
जल संसाधन विभाग की बड़ी लापरवाही? हसदेव नदी किनारे सीमेंट की बोरियों व कचरे का अंबार, उठे गंभीर सवाल
संवाददाता: हरिराम देवांगन
जय जोहार सीजी न्यूज़ |
चांपा, जांजगीर-चांपा।
जांजगीर-चांपा जिले सहित आसपास के कई क्षेत्रों की जीवनरेखा मानी जाने वाली हसदेव नदी के संरक्षण को लेकर जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नदी क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान एनीकट के निकट बड़ी संख्या में सीमेंट की खाली बोरियों में भरी रेत एवं अन्य ठोस कचरा नदी घाट पर बिखरा हुआ मिला, जिससे प्राकृतिक जल स्रोत की स्वच्छता और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कचरा लंबे समय से नदी किनारे पड़ा हुआ है, लेकिन इसे हटाने या संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई के कोई प्रयास दिखाई नहीं दिए। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि प्राकृतिक जल स्रोतों की निगरानी और संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाला विभाग नियमित निरीक्षण क्यों नहीं कर रहा है।
हसदेव नदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन और हजारों लोगों की आजीविका का आधार भी है। विशेषज्ञों के अनुसार नदी तट पर इस प्रकार का कचरा लंबे समय तक पड़ा रहने से जल प्रदूषण और नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि जल संसाधन विभाग पूरे मामले की जांच कराए, नदी किनारे पड़े कचरे को तत्काल हटाया जाए तथा यदि किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा यह कचरा फेंका गया है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
(नोट: समाचार में लगाए गए आरोप स्थानीय निरीक्षण और प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)














