
यादें कड़वी: जब प्रकृति ने दिखाया अपना रौद्र रूप, बाबा तपसी का धाम भी बना था डुबान क्षेत्र
चांपा। करीब 12 वर्ष पहले 7 अगस्त 2014 को जांजगीर-चांपा जिले में हुई लगातार मूसलाधार बारिश की यादें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। करीब 15 से 20 दिनों तक हुई झमाझम बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था। हसदेव नदी का जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात निर्मित हुए और ऐतिहासिक डोंगा घाट स्थित बाबा तपसी का तपस्या स्थल भी जलमग्न हो गया था।
नगर के ऐतिहासिक डोंगा घाट को आदि पुरुष बाबा तपसी की साधना स्थली के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि बाबा तपसी सिद्ध साधक थे और उनकी तपस्या व आध्यात्मिक साधना के कारण दूर-दूर से श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए यहां पहुंचते थे। लेकिन वर्ष 2014 में प्रकृति के रौद्र रूप के सामने यह पावन स्थल भी अछूता नहीं रह सका।
नगर के जागरूक नागरिक चमरा धीवर ने मोबाइल में सुरक्षित पुरानी तस्वीरों और अपनी आंखों देखी स्थिति को याद करते हुए बताया कि उस समय लगातार भारी बारिश के कारण हसदेव नदी के दोनों पाट उफान पर आ गए थे। चारों ओर पानी ही पानी नजर आ रहा था। बाढ़ का असर डोंगा घाट तक पहुंचा और मंदिर परिसर का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया था। इस भयावह मंजर को देखने के लिए नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे थे।
कई दिनों तक डोंगा घाट में ऐसे ही हालात बने रहे। जलभराव के कारण श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना और सिद्ध हनुमान पीठ के दर्शन से भी वंचित रहे। वर्ष 2014 के बाद भी कई बार हसदेव नदी ने अपना उफनता और रौद्र रूप दिखाया, लेकिन 7 अगस्त 2014 जैसी भयावह स्थिति दोबारा न बने, यही क्षेत्रवासियों की कामना है।
आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है बाबा तपसी
डोंगा घाट मंदिर परिसर में संगमरमर से निर्मित बाबा तपसी की विशाल प्रतिमा आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। तपस्या मुद्रा में विराजमान बाबा तपसी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए भक्त यहां पहुंचते हैं। मकर संक्रांति, कृष्ण जन्माष्टमी, लक्ष्मी पूजा, दीपावली, हनुमान जयंती और गुरु पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों पर मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है।
प्रकृति के उस रौद्र रूप की कड़वी यादें आज भी क्षेत्रवासियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती हैं। लोगों का मानना है कि प्रकृति से छेड़छाड़ का परिणाम कितना भयावह हो सकता है, वर्ष 2014 की वह बाढ़ इसका जीवंत उदाहरण है। क्षेत्रवासी अब यही उम्मीद करते हैं कि हसदेव नदी का ऐसा विकराल रूप दोबारा देखने को न मिले और बाबा तपसी का यह पावन धाम सदैव सुरक्षित रहे।
जय जोहार सीजी न्यूज़
संवाददाता — हरी देवांगन















