
डबरी पाटकर बनाया करोड़ों का अंडरब्रिज, अब दलदल और गंदे पानी से लबालब
ऊपर से राहगीरों की मजबूरी, नीचे जल निकासी की व्यवस्था पर सवाल; गलत मौका-मुआयना का खामियाजा भुगत रहे नगरवासी
जय जोहार छत्तीसगढ़ | चांपा। चांपा में रेलवे थाना के समीप बायपास रोड पर करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया अंडरब्रिज इन दिनों सुविधा से ज्यादा परेशानी का कारण बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिस स्थान पर अंडरब्रिज का निर्माण कराया गया, वहां पहले से ही डबरी और दलदली जमीन मौजूद थी। इसके बावजूद स्थल को समतल कर उसी स्थान पर अंडरब्रिज का निर्माण करा दिया गया।

निर्माण के बाद से ही अंडरब्रिज में पानी भरने की समस्या बनी हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक डबरी की ओर से लगातार पानी रिसकर अंडरब्रिज में पहुंचता है और समुचित जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण पानी लंबे समय तक जमा रहता है। इसके चलते अंडरब्रिज में कीचड़, गंदगी और दूषित पानी पसरा रहता है।
जनहित के लिए बना अंडरब्रिज, लेकिन आवागमन हुआ मुश्किल: रेलवे द्वारा लोगों को रेलवे ट्रैक पार करने से बचाने और सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अंडरब्रिज का निर्माण कराया गया था। लेकिन वर्तमान हालात में राहगीरों को उसी अंडरब्रिज से गुजरने के लिए गंदे पानी और कीचड़ का सामना करना पड़ता है।

बारिश के समय स्थिति और भी खराब होने की बात स्थानीय लोग बताते हैं। उनका कहना है कि समस्या केवल बरसाती पानी की नहीं है, बल्कि अंडरब्रिज के आसपास मौजूद डबरी और दलदली क्षेत्र से पानी के रिसाव के कारण लंबे समय से जलभराव बना रहता है।
ऊपर अंडरब्रिज, नीचे पानी और कीचड़—आखिर निकासी व्यवस्था कहां? मौके की स्थिति को लेकर सबसे बड़ा सवाल जल निकासी व्यवस्था पर उठ रहा है। एक तरफ डबरी का पानी अंडरब्रिज की ओर पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर जमा पानी की निकासी के लिए प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं देती।

नतीजा यह है कि अंडरब्रिज के भीतर गंदा पानी और कीचड़ जमा रहता है। राहगीरों को इसी पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई लोग परेशानी से बचने के लिए दूसरे रास्ते का इस्तेमाल करते हैं, जबकि कुछ लोगों के लिए रेलवे क्रॉसिंग से होकर जाना मजबूरी बन जाता है।
निर्माण से पहले हुए मौका-मुआयने पर गंभीर सवाल: स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अंडरब्रिज निर्माण से पहले रेलवे की संबंधित टीम ने स्थल का मौका-मुआयना और तकनीकी सर्वे किया होगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उस समय वहां मौजूद डबरी, दलदली जमीन और जलभराव की स्थिति का आकलन किया गया था?
यदि स्थल पर पहले से पानी जमा होने की स्थिति मौजूद थी, तो निर्माण के दौरान पानी की निकासी के लिए स्थायी तकनीकी व्यवस्था क्यों नहीं की गई—यह सवाल अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

लगातार पानी और गीली मिट्टी से निर्माण की मजबूती पर भी चिंता: अंडरब्रिज में लंबे समय से पानी जमा रहने को लेकर क्षेत्रवासियों ने इसकी संरचनात्मक मजबूती पर भी चिंता जताई है। हालांकि अंडरब्रिज की वास्तविक स्थिति और उसकी मजबूती के संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा जांच जरूरी है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि रेलवे प्रशासन अंडरब्रिज का तकनीकी निरीक्षण कराए और यह स्पष्ट करे कि लगातार जलभराव का निर्माण की संरचना पर कोई प्रभाव पड़ रहा है या नहीं।
करोड़ों की लागत, फिर भी समस्या जस की तस: जिस अंडरब्रिज का उद्देश्य नगरवासियों को रेलवे ट्रैक पार करने के जोखिम से बचाना और सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना था, वही अंडरब्रिज यदि गंदे पानी और कीचड़ से भरा रहे तो निर्माण की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब स्थानीय नागरिक रेलवे प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि अंडरब्रिज की जल निकासी व्यवस्था की जांच, डबरी से आने वाले पानी के स्थायी रोकथाम की व्यवस्था, नियमित सफाई तथा निर्माण की तकनीकी मजबूती का परीक्षण कराया जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल: क्या अंडरब्रिज निर्माण से पहले स्थल का सही तकनीकी सर्वे हुआ था?
क्या डबरी और दलदली जमीन की स्थिति को ध्यान में रखा गया था?
जल निकासी की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
और करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी नगरवासियों को गंदे पानी से होकर गुजरने की मजबूरी क्यों है?
इन सवालों पर रेलवे प्रशासन का जवाब और मौके पर ठोस कार्रवाई अब जरूरी मानी जा रही है।



















