
रेलवे अंडरब्रिज बना अपशिष्ट का डंपिंग यार्ड
कचरा फेंकने वालों का ‘तहे दिल से स्वागत’! जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल
जय जोहार छत्तीसगढ़ | चांपा।
चांपा नगरपालिका क्षेत्र में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को लेकर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था संचालित होने और इसके लिए नगरवासियों से निर्धारित शुल्क वसूले जाने के बावजूद जगह-जगह कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं। हालात यह हैं कि थाना के समीप स्थित रेलवे अंडरब्रिज के आसपास का क्षेत्र धीरे-धीरे अनधिकृत कचरा डंपिंग यार्ड में तब्दील होता नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यहां नियमित रूप से कचरा फेंका जा रहा है। बरसात के दिनों में कचरे से उठने वाली दुर्गंध ने आसपास रहने वाले लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शहर में घर-घर से कचरा उठाने की व्यवस्था है, तो आखिर यह कचरा रेलवे अंडरब्रिज के आसपास कौन और क्यों फेंक रहा है?

शुल्क वसूली के बावजूद कचरा प्रबंधन बदहाल
डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए स्वच्छता दीदियों द्वारा घर-घर पहुंचकर कचरा एकत्र किया जाता है। यह व्यवस्था निशुल्क नहीं है, बल्कि नगरपालिका के निर्देशानुसार नगरवासियों से निर्धारित शुल्क भी लिया जाता है।

इसके बावजूद शहर की गलियों, मोहल्लों, चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर आधा- कचरा उठने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई स्थानों पर कचरा जमा रहने से नगर की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ऐसे में सवाल यह भी है कि जब नागरिकों से कचरा प्रबंधन के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है, तो फिर शहर में कचरे के ढेर क्यों दिखाई दे रहे हैं?

अंडरब्रिज के आसपास फैल रही दुर्गंध
रेलवे अंडरब्रिज के आसपास जमा कचरे के कारण बरसात के मौसम में दुर्गंध की समस्या गंभीर होती जा रही है। यह इलाका रिहायशी क्षेत्र के समीप होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता पैदा कर रहा है।
कचरे के आसपास घुमंतू पशुओं का जमावड़ा भी देखा जाता है। पशुओं के रेलवे लाइन की ओर चले जाने की स्थिति में उनके लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पालिका के कचरा घर का औचित्य भी सवालों में
नगरपालिका द्वारा हनुमान धारा वार्ड क्रमांक-1 में कचरा घर संचालित किया जा रहा है। यहां शहरभर से एकत्र किए गए कचरे को लाकर अलग-अलग करने के लिए सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर में कचरा संग्रहण के दौरान कई जगहों पर सफाई कर्मचारी आधा-अधूरा कचरा ही उठाते हैं। लोगों का कहना है कि सफाई व्यवस्था की पर्याप्त निगरानी नहीं होने के कारण यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है।
यदि कचरा संग्रहण के लिए व्यवस्था, कर्मचारी और बजट उपलब्ध है, तो फिर सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जमा होने की समस्या लगातार क्यों बनी हुई है—यह अपने आप में बड़ा सवाल है।
सफाई कर्मचारियों पर अंडरब्रिज के पास कचरा फेंकने का आरोप: अंडरब्रिज के आसपास रहने वाले कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि नगरपालिका के सफाई कर्मचारी कचरा पूरी तरह वाहन में भरने के बजाय आसपास ही फेंक देते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह नगरपालिका की कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
लोगों का कहना है कि शहर से एकत्र होने वाले कचरे को हनुमान धारा रोड स्थित कचरा घर तक पहुंचाने की व्यवस्था होने के बावजूद यदि कचरा रास्ते या अंडरब्रिज के आसपास ही फेंका जा रहा है, तो निगरानी व्यवस्था की भूमिका पर भी सवाल उठना लाजिमी है।
जनता भी जिम्मेदार, लेकिन व्यवस्था की जवाबदेही भी जरूरी: शहर को स्वच्छ रखना केवल नगरपालिका की जिम्मेदारी नहीं है। नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित स्थान और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार ही कचरा दें और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंकें।
लेकिन दूसरी ओर, जब नगरपालिका कचरा संग्रहण और प्रबंधन के नाम पर नगरवासियों से शुल्क ले रही है और इस पूरी व्यवस्था पर सार्वजनिक धन खर्च हो रहा है, तब व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही भी सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
रेलवे अंडरब्रिज के आसपास जमा कचरा अब केवल स्वच्छता का मामला नहीं रह गया है, बल्कि दुर्गंध, सार्वजनिक स्वास्थ्य, घुमंतू पशुओं की सुरक्षा और रेलवे क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बनता जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि नगरपालिका प्रशासन इस मामले में मौके का निरीक्षण कर कचरा डंप करने वालों पर कार्रवाई करता है या फिर रेलवे अंडरब्रिज आने वाले दिनों में भी ‘कचरा फेंकने वालों का पसंदीदा डंपिंग यार्ड’ बना रहेगा।


















