
संवाददाता हरिराम देवांगन/राशन कार्ड से नाम विलोपित होते ही चांपा डाकघर में आधार सत्यापन को लेकर मेला जैसी भीड़, ठंड में महिलाएं-बुजुर्ग परेशान
जय जोहार सीजी न्यूज़, छत्तीसगढ़
चांपा (जांजगीर-चांपा)
प्रशासनिक स्तर पर जाने-अनजाने में हुई लापरवाही का खामियाजा अब आम राशन हितग्राही भुगतने को मजबूर हैं। राशन कार्डों से ठोक के भाव में नाम विलोपित किए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई है। नाम कटते ही अनेक परिवारों के हिस्से का राशन बंद हो गया, जिससे शासन-प्रशासन और राशन दुकानदारों के प्रति जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
बताया जा रहा है कि शासन के निर्देशानुसार लगभग एक वर्ष पूर्व सभी राशन कार्डधारियों के आधार सत्यापन एवं अंगूठा निशान अपडेट किए जाने थे। इस दौरान कुछ हितग्राहियों द्वारा समय पर अंगूठा निशान नहीं दिया गया, वहीं कई मामलों में अंगूठा निशान देने के बावजूद राशन दुकानदारों की लापरवाही के चलते सत्यापन सही ढंग से दर्ज नहीं हो सका।
सब कुछ सामान्य चलता रहा, लेकिन जैसे ही नई राशन सूची जारी हुई, बड़ी संख्या में सदस्यों के नाम सूची से गायब मिले। इसके बाद जब हितग्राहियों को राशन नहीं मिला, तब यह पूरा मामला उजागर हुआ।
डाकघर बने भीड़ के केंद्र, हालात बेकाबू
राशन कार्ड में नाम पुनः जुड़वाने के लिए लोग आधार अपडेट केंद्रों की ओर दौड़ पड़े। चांपा डाकघर सहित गिने-चुने आधार अद्यतन केंद्रों में पिछले कई दिनों से मेला जैसी भीड़ देखी जा रही है।
सुबह 7 बजे से ठंड में लंबी कतारें, धक्का-मुक्की, अव्यवस्था और अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है।
इस भीड़ में महिलाएं, छोटे मासूम बच्चे और बुजुर्ग घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। सीमित संसाधन और अव्यवस्थित व्यवस्था के कारण रोजाना केवल चंद लोगों का ही आधार अपडेट हो पा रहा है, जबकि भीड़ सैकड़ों में रहती है।
गिने-चुने केंद्र, हजारों लोग:
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले अधिकांश चॉइस सेंटरों में आधार अपडेट की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन उच्च स्तरीय आदेशों के बाद यह कार्य लगभग बंद कर दिया गया। अब जिला स्तर पर केवल दो केंद्रों में आधार अपडेट होने से जनता की परेशानी कई गुना बढ़ गई है।
स्थिति यह है कि यदि तय समय सीमा के भीतर आधार सत्यापन नहीं हुआ, तो जनवरी माह में हजारों हितग्राही राशन से वंचित रह जाएंगे, जिससे आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
किसकी है जिम्मेदारी?
इस पूरे मामले में जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं—
कहीं आम जनता की लापरवाही,
कहीं राशन दुकानदारों की उदासीनता,
तो कहीं शासन-प्रशासन की तकनीकी और व्यवस्थागत चूक।
कई हितग्राहियों ने बताया कि उन्होंने समय पर दुकान में जाकर आधार कार्ड की फोटोकॉपी और अंगूठा निशान दिया था, इसके बावजूद उनके परिवार के सदस्यों का नाम सूची से हटा दिया गया।
नेटवर्क और सिस्टम भी बना बड़ी समस्या:
आधार सत्यापन से लेकर राशन वितरण और बैंकिंग सेवाओं तक, हर जगह घटिया नेटवर्क, पुराने स्कैनर और कमजोर कंप्यूटर सिस्टम आम जनता की परेशानी बढ़ा रहे हैं। बार-बार अंगूठा निशान फेल होने से न केवल हितग्राही बल्कि कर्मचारी भी परेशान हैं।
बड़ा सवाल—कब अपडेट होगा सिस्टम?
यह स्थिति प्रशासनिक कसावट और तकनीकी सुधार की मांग कर रही है। यदि समय रहते नेटवर्किंग, मशीनरी और आधार अपडेट केंद्रों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले दिनों में जनता की परेशानी और बढ़ेगी।
फिलहाल हालात ऐसे हैं कि आम जनता मजबूरी में अव्यवस्था झेल रही है, और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।








