
✍️ ब्यूरो चीफ – हरि देवांगन/ क्या अफसर भूल गए हैं कि वे जनता के सेवक हैं? 👨💼
जिला उप मुख्यालय चांपा:
लोकतंत्र में जनता जनार्दन 👥 सर्वोपरि है, संविधान 📜 ने भी जनता को ही सर्वोच्च माना है। सरकारी अफसर और कर्मचारी जनता के सेवक कहलाते हैं… लेकिन जांजगीर-चांपा जिले 🏢 का हाल कुछ और ही बयां कर रहा है।
🚗👉 कार्यालयों के मुख्य गेट के ठीक सामने अफसरों के सरकारी वाहन खड़े रहते हैं, जिससे आम जनता और दिव्यांग ♿ को आने-जाने में भारी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं।
⚖️ नियम साफ है कि जनता को वाहन 🚲🛵 नियत स्थान पर पार्क करना होगा, वरना जुर्माना लगेगा। लेकिन साहब लोग खुद के लिए नियम तोड़ते हुए गाड़ी 🚙 सीधे गेट पर खड़ी कर देते हैं।
⏰ ये गाड़ियां कुछ मिनटों के लिए नहीं बल्कि पूरे दफ्तर समय तक वहीं जमी रहती हैं।
🤔 सवाल ये उठता है –
क्या अफसर भूल गए हैं कि वे जनता के सेवक हैं? 👨💼
क्या सरकारी वाहन भी आम जनता की गाड़ियों के साथ पार्क नहीं होना चाहिए? 🚘
क्या शासन इस मनमानी पर कार्रवाई करेगा? 🏛️
♿ दिव्यांगों के लिए बनाए गए आसान मार्ग का नियम भी धज्जियां उड़ाते हुए नज़र आता है।
अगर यही हाल रहा तो जनता को आगे भी “पतली गलियों” से होकर ही साहब तक पहुंचना पड़ेगा… 😡






















