
हथबंद शराब दुकान पर ओवररेटिंग और कोचिया प्रथा का आरोप, शिवसेना ने की बंद कराने की मांग
15 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
हथबंद/बलौदाबाजार। विकासखंड सिमगा के ग्राम हथबंद स्थित शासकीय कंपोजिट मदिरा दुकान एक बार फिर विवादों के घेरे में है। शराब दुकान में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर शराब बेचने, विरोध करने वाले ग्रामीणों के साथ अभद्र व्यवहार करने और कथित रूप से कोचियों को बड़ी मात्रा में शराब उपलब्ध कराने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर शिवसेना ने आबकारी विभाग से शिकायत कर तत्काल जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।
ओवररेटिंग और अवैध बिक्री का आरोप:
शिवसेना के प्रदेश सचिव ईश्वर प्रसाद निषाद ने आरोप लगाया कि हथबंद स्थित शराब दुकान में खुलेआम निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूली जा रही है। जब ग्रामीण इसका विरोध करते हैं तो दुकान के कर्मचारियों द्वारा उनके साथ गाली-गलौज एवं मारपीट किए जाने की शिकायत भी सामने आई है।

शिवसेना का आरोप है कि दुकान से कथित रूप से कोचियों को बोरियों में भरकर बड़ी मात्रा में शराब उपलब्ध कराई जा रही है। इसके चलते रिंगनी, केसदा, धोधा, डोंगरिया, कुकरचुंदा, खिलोरा, मोहभट्ठा और लावर सहित आसपास के गांवों में अवैध शराब बिक्री का कारोबार फल-फूल रहा है।
15 दिन बाद भी कार्रवाई का इंतजार:
इस पूरे मामले को लेकर शिवसेना ने 14 अक्टूबर को जिला आबकारी अधिकारी को लिखित ज्ञापन सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की थी। संगठन का कहना है कि ज्ञापन सौंपे जाने के 15 दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

कार्रवाई में देरी को लेकर शिवसेना ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारियों द्वारा संरक्षण दिए जाने की आशंका भी जताई है।

मंत्री और कलेक्टर को भेजी शिकायत:
शिवसेना ने अपनी शिकायत की प्रतिलिपि आबकारी मंत्री एवं कलेक्टर बलौदाबाजार को भी भेजी है। संगठन ने मांग की है कि शराब दुकान के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित दुकान के संचालन पर रोक लगाने तथा आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की गई है।

आबकारी अधिकारी ने कही कार्रवाई की बात:
इस संबंध में आबकारी अधिकारी निधीश कोस्टी से संपर्क करने पर उन्होंने मामले में कार्रवाई करने की बात कही है। अब देखना होगा कि आबकारी विभाग शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि यदि शराब दुकान में सब कुछ नियमानुसार संचालित हो रहा है, तो स्टॉक और बिक्री रजिस्टर के साथ सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने में देरी क्यों? ग्रामीणों को विभागीय जांच और कार्रवाई का इंतजार है।
जय जोहार सीजी न्यूज़ | हथबंद से विशेष रिपोर्ट
नोट: ओवररेटिंग, मारपीट और कोचिया प्रथा से जुड़े आरोप शिवसेना द्वारा लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही होगी।





















