
सच के लिए संघर्ष करना कोई गुनाह नहीं, बल्कि एक जागरूक नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है।
तिल्दा नेवरा। यदि हम अन्याय, भ्रष्टाचार, शोषण और गलत नीतियों के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाएंगे, तो बदलाव की उम्मीद कैसे करेंगे? अपने अधिकारों की रक्षा करना और समाज के हित में अपनी बात रखना लोकतंत्र की ताकत है।
हर संघर्ष केवल अपने लिए नहीं होता। कई लोग आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य, न्याय और समान अवसरों के लिए भी खड़े होते हैं। आज यदि हम चुप रहेंगे, तो कल हमारी आने वाली पीढ़ियाँ हमसे पूछेंगी—“जब अन्याय हो रहा था, तब आपने क्या किया?” उस समय हमारे पास मौन रहने का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं होगा।
आवाज़ उठाने का अर्थ हिंसा नहीं, बल्कि संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात दृढ़ता से रखना है। इतिहास गवाह है कि समाज में बड़े बदलाव उन लोगों ने किए जिन्होंने सच का साथ दिया और कठिन परिस्थितियों में भी न्याय की लड़ाई नहीं छोड़ी।
याद रखिए— “सच के लिए लड़ना अपराध नहीं, बल्कि साहस है।
अपने हक की आवाज़ उठाना गलत नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है।
यदि आज हम अन्याय के विरुद्ध नहीं बोलेंगे, तो आने वाला कल हमें कभी माफ़ नहीं करेगा।”
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/9131419735















