
न्यायालय का सख्त फैसला: झूठे दुष्कर्म व एससी-एसटी केस में महिला को 10 साल की सजा
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल
दतिया (मध्यप्रदेश), 21 अप्रैल।
जिले में न्यायालय द्वारा एक अहम और सख्त फैसला सुनाया गया है। दुष्कर्म एवं एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठा मामला दर्ज कराने के आरोप में एक महिला को 10 वर्ष के कठोर कारावास एवं 10,500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। यह निर्णय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश भंडारी द्वारा 16 अप्रैल 2026 को सुनाया गया।
🔹 मामले का विवरण:
प्रकरण के अनुसार, वैभवी सनोरिया नामक महिला ने थाना बड़ौनी में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 22 सितंबर 2021 की रात उसके पड़ोसी कालीचरण ने उसके घर में घुसकर दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच पूरी करते हुए आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
🔹 सुनवाई के दौरान आया मोड़:
न्यायालय में सुनवाई के दौरान फरियादिया अपने ही बयान से मुकर गई। उसने स्वीकार किया कि रुपये के लेनदेन के विवाद के चलते उसने आरोपी के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया था। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी कालीचरण को दोषमुक्त कर दिया।
🔹 महिला के खिलाफ कार्रवाई:
न्यायालय ने झूठा मामला दर्ज कराने को गंभीर मानते हुए महिला के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके तहत वैभवी सनोरिया के खिलाफ नया प्रकरण दर्ज किया गया और सुनवाई के उपरांत उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 182, 195 एवं 211 के तहत दोषी ठहराया गया।
🔹 कोर्ट की टिप्पणी:
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि झूठे प्रकरण दर्ज कराने की बढ़ती प्रवृत्ति न्याय प्रणाली के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इससे न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास भी कमजोर पड़ता है।
🔹 अभियोजन पक्ष की भूमिका:
मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक अरुण कुमार लिटोरिया ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाहों एवं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोप सिद्ध मानते हुए सजा सुनाई।
✍️ यह फैसला उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है, जो निजी विवादों में गंभीर धाराओं का दुरुपयोग करते हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि कानून के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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