
जय जोहार सीजी न्यूज़ / ब्यूरो चीफ हरिराम देवांगन/मॉडल स्टेशन बनने से पहले ही खुली पोल: चांपा जंक्शन में एलईडी डिस्प्ले खराब, लिफ्ट बंद
जिला उप मुख्यालय – चांपा
देशभर में केंद्रीय बजट के अंतर्गत हजारों रेलवे स्टेशनों को मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित कर उन्हें आधुनिक और आकर्षक स्वरूप देने की योजना पर कार्य जारी है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण स्टेशनों में शामिल Champa Junction में भी सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधाओं के विस्तार का कार्य किया जा रहा है।
लेकिन स्टेशन का रिनोवेशन कार्य पूर्ण होने से पहले ही स्तरहीन कार्य और संभावित भ्रष्टाचार की तस्वीर सामने आने लगी है।
🔴 चंद हफ्तों में ही एलईडी डिस्प्ले खराब:
स्टेशन के बाहरी हिस्से में लाल रंग के बड़े अक्षरों में “चांपा” दर्शाने वाला एलईडी डिस्प्ले बोर्ड लगाया गया है। लेकिन कुछ ही महीनों में उसमें तकनीकी खराबी आ गई।

बताया जा रहा है कि “एच” और “पी” अक्षर लंबे समय से बंद पड़े हैं, जिससे पूरा बोर्ड बदसूरत दिखाई दे रहा है।
हैरानी की बात यह है कि एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी संबंधित अधिकारियों द्वारा इसकी मरम्मत के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं जिम्मेदारों और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत तो नहीं?
🚆 मुंबई–हावड़ा रूट का महत्वपूर्ण स्टेशन:
Mumbai–Howrah route पर स्थित होने के कारण चांपा जंक्शन का विशेष महत्व है। प्रतिदिन सैकड़ों यात्री यहां से आवागमन करते हैं।
केंद्र सरकार की योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर स्टेशन को सुविधासंपन्न और आकर्षक बनाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
🛗 करोड़ों की लिफ्ट बनी शोपीस, अब तक नहीं हुई चालू: प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 2 को जोड़ने के लिए वर्षों पहले लिफ्ट का निर्माण किया गया था। यह निर्माण कार्य भी करोड़ों रुपये की लागत से हुआ।
लेकिन समाचार लिखे जाने तक यह लिफ्ट जनसेवा के लिए शुरू नहीं की गई है। स्थिति यह है कि नई बनी लिफ्ट कबाड़ में तब्दील होने की कगार पर पहुंच रही है।
यदि यात्री सुविधा के नाम पर बनाई गई संरचना आम जनता के उपयोग में ही न आए, तो ऐसे निर्माण कार्य की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
❓ जिम्मेदार अधिकारी क्यों हैं खामोश?
देशवासियों द्वारा अदा किए गए टैक्स के करोड़ों रुपये से रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। ऐसे में यदि कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्न उठ रहे हों और महीनों तक खराबियां दूर न की जाएं, तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।
टैक्सदाताओं के धन का दुरुपयोग है या प्रशासनिक उदासीनता — यह जांच का विषय है।
📰 जनहित में उठती आवाज
जय जोहार सीजी न्यूज़ पूर्व में भी जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाता रहा है। प्रशासनिक कार्यप्रणाली में दिख रही कमियों को उजागर कर जिम्मेदारों को जवाबदेह बनाने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा।
सवाल यही है —
क्या मॉडल स्टेशन का सपना सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा?
क्या जिम्मेदार अधिकारी जनता के प्रश्नों का जवाब देंगे?
जनहित सर्वोपरि है — और सवाल पूछना लोकतंत्र की मजबूती का आधार।








