
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/ खाकी पर कलंक: मासूम की मौत के मामले में रिश्वत लेते SI गिरफ्तार, ASI भी दबोचा गया
कोरिया, छत्तीसगढ़।
जिले में सामने आए एक सनसनीखेज मामले ने कानून व्यवस्था और पुलिस तंत्र की संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। एक गरीब मजदूर परिवार अपने मासूम बेटे की डूबने से हुई मौत के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि आरोप है—जांच के नाम पर उनसे रिश्वत मांगी गई।
Anti Corruption Bureau (ACB) अंबिकापुर की टीम ने कार्रवाई करते हुए बचरापोड़ी चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक Abdul Munaf को 25,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। मामले में सहायक उप निरीक्षक Guru Prasad Yadav को भी साजिश और रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
हादसा जिसने जन्म दिया आरोपों को:
जानकारी के अनुसार, प्रार्थी सत्येन्द्र कुमार प्रजापति के घर पर ईंट निर्माण का कार्य चल रहा था। परिसर में खोदे गए गड्ढे में पानी भर गया था, जहां काम कर रहे मजदूर मोहित घसिया के मासूम बेटे की कथित तौर पर डूबने से मौत हो गई।
परिवार गहरे शोक में था। आरोप है कि मामले की संवेदनशील जांच के बजाय चौकी स्तर पर अवैध वसूली का दबाव बनाया गया।

जांच के नाम पर सौदेबाज़ी?
शिकायत के मुताबिक, उस समय चौकी में पदस्थ एएसआई गुरु प्रसाद यादव ने मामले को रफा-दफा करने के नाम पर 50,000 रुपये की मांग की। कथित बातचीत के बाद 25,000 रुपये में ‘समझौता’ तय हुआ।
आरोप है कि तबादले के बाद भी यह सिलसिला नहीं रुका। नए चौकी प्रभारी एसआई अब्दुल मुनाफ ने कथित तौर पर ‘अधूरा सौदा’ पूरा करने के लिए प्रार्थी को रकम लेकर चौकी बुलाया।
ACB का ट्रैप, रंगे हाथों गिरफ्तारी:
भ्रष्टाचार से परेशान होकर प्रार्थी ने ACB अंबिकापुर से संपर्क किया। शिकायत का सत्यापन करने के बाद ब्यूरो ने ट्रैप बिछाया।
जैसे ही 25,000 रुपये की राशि चौकी में सौंपी गई, घात लगाए टीम ने एसआई अब्दुल मुनाफ को रंगे हाथों पकड़ लिया। जांच में भूमिका सामने आने पर एएसआई गुरु प्रसाद यादव को भी गिरफ्तार किया गया।
कानूनी कार्रवाई:
आरोपी: एसआई अब्दुल मुनाफ, एएसआई गुरु प्रसाद यादव
धाराएं: Prevention of Corruption Act, 1988 की धारा 7 (लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेना) एवं धारा 12 (रिश्वत दिलाने/उकसाने में सहयोग)
स्थिति: दोनों आरोपियों को विधिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार कर आगे की जांच जारी
सिस्टम पर सवाल:
यह मामला न केवल पुलिस तंत्र की जवाबदेही पर प्रश्न उठाता है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि क्या शोकग्रस्त परिवारों के साथ भी जांच के नाम पर दबाव बनाया जा रहा है?
ACB की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि पद की गरिमा का दुरुपयोग करने वालों पर कानून का शिकंजा कसना तय है।
जनता की उम्मीद है—न्याय सिर्फ हो ही नहीं, दिखे भी।








