
वन बैरियर सोते रहे, 36 सागौन लठ्ठे निकल गए; डायल-112 ने खोली वन सुरक्षा की पोल36 सागौन लठ्ठों से भरा वाहन दो वन बैरियर पार, डायल-112 ने पकड़ा
कवर्धा। उप वनमंडल पंडरिया के पूर्व परिक्षेत्र अंतर्गत कक्ष क्रमांक 511 (कामठी) से 36 नग सागौन के लठ्ठे बरामद होने की घटना ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, बहुमूल्य सागौन से भरा वाहन रहमानकापा और मैनपुरा वन बैरियर पार करते हुए लगभग 20 किलोमीटर दूर रेहुटा तक पहुंच गया, लेकिन वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। अंततः डायल-112 की सतर्कता से वाहन पकड़ा गया, जिसके बाद वन विभाग को सूचना देकर आवश्यक कार्रवाई के लिए बुलाया गया।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन वन बैरियरों पर चौबीसों घंटे निगरानी और जांच का दावा किया जाता है, वहां से सागौन से भरा वाहन बिना किसी रोक-टोक के कैसे गुजर गया। यदि डायल-112 समय पर सक्रिय नहीं होती, तो लकड़ी अपने गंतव्य तक पहुंच सकती थी।
वन संपदा की सुरक्षा के लिए विभाग द्वारा बैरियर, गश्ती दल और निगरानी व्यवस्था पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में सागौन के लठ्ठों का बैरियर पार कर जाना सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि क्षेत्र में समय-समय पर लकड़ी तस्करी की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन प्रभावी निगरानी और जवाबदेही के अभाव में उन पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है।
यह मामला वन विभाग की सूचना एवं निगरानी प्रणाली की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। जिस कार्रवाई की अपेक्षा वन विभाग से थी, वह डायल-112 की सतर्कता से संभव हुई। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि संबंधित वाहन किन मार्गों से गुजरा, किन-किन बैरियरों पर ड्यूटी में कौन कर्मचारी तैनात थे, वाहन की जांच क्यों नहीं हुई और कहीं इस पूरे मामले में गंभीर लापरवाही अथवा किसी स्तर पर मिलीभगत तो नहीं रही।
अब आवश्यकता इस बात की है कि जांच केवल लकड़ी जब्ती तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि वन संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र, बैरियर व्यवस्था और जवाबदेही प्रणाली की व्यापक समीक्षा आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।













