
विरोध प्रदर्शनों की गूंज के बीच मदिरा प्रेमियों पर “दारू की बरसात”
जिले में चहुंओर अवैध शराब का बोलबाला, विभागीय कार्रवाई पर लगा ‘अलीगढ़ का ताला’
जय जोहार सीजी न्यूज़ | छत्तीसगढ़
ब्यूरो चीफ : हरिराम देवांगन
जिला मुख्यालय : जांजगीर–चांपा जांजगीर–चांपा जिला इन दिनों अवैध शराब के कारोबार को लेकर गंभीर संकट से गुजर रहा है। एक समय लोकप्रिय रही ग़ज़ल— “हुई महंगी बहुत शराब, थोड़ी-थोड़ी पिया करो”—आज जिले में हकीकत का ऐसा कड़वा रूप ले चुकी है, जिसे न आबकारी विभाग पचा पा रहा है और न ही आम जनता।
पिछले कई महीनों से जिले के गली-मोहल्लों, चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर खुलेआम शराब पीने-पिलाने और अवैध रूप से उपलब्ध कराने का सिलसिला तेज़ी से बढ़ा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब केवल जागरूक नागरिक ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन, धरना और आंदोलन करने को मजबूर हो गई हैं।
इसके बावजूद आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी—निरीक्षक से लेकर आयुक्त स्तर तक—अजीब खामोशी ओढ़े बैठे हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो जिले में सब कुछ “खैरियत” में हो। सोशल मीडिया, समाचार पत्रों और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से लगातार चेतावनी दिए जाने के बाद भी विभागीय निष्क्रियता चरम पर है।
आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय अवैध शराब कारोबारियों को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिल रहा है, जिसके चलते यह धंधा छत्रछाया में फल-फूल रहा है। नतीजतन, जिले के अनेक इलाकों में शराब जनित असामाजिक और आपराधिक गतिविधियों में लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पहले से ही जिले में सरकारी शराब दुकानों की भरमार है, जहां मदिरा प्रेमियों को पर्याप्त मात्रा में शराब उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं आबकारी विभाग की उदासीनता के कारण सरकारी ठेकों के अतिरिक्त कई स्थानों पर चोरी-छिपे और खुलेआम अवैध शराब बेची जा रही है। इसका सीधा असर सामाजिक सौहार्द, पारिवारिक शांति और आर्थिक संतुलन पर पड़ रहा है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब महिलाएं समूह बनाकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर अवैध शराब कारोबार पर रोक लगाने की कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।








