
संवाददाता हरिराम देवांगन/ रसोई गैस की किल्लत या सिस्टम की गड़बड़ी? जांजगीर-चांपा में उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी
जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़)
जिले में इन दिनों रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर जहां जिम्मेदार विभागों द्वारा लगातार यह दावा किया जा रहा है कि गैस की कोई कमी नहीं है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें और उपभोक्ताओं की बढ़ती परेशानी इस दावे पर सवाल खड़े कर रही है।
⚠️ एजेंसी में भीड़, लेकिन गैस नहीं:
स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में उपभोक्ता गैस एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। एजेंसी पहुंचने पर उन्हें ऑनलाइन बुकिंग करने की सलाह देकर वापस भेज दिया जाता है, जबकि ऑनलाइन बुकिंग के बाद भी समय पर गैस उपलब्ध नहीं हो रही है।
📱 भ्रामक मैसेज से बढ़ी परेशानी:
उपभोक्ताओं का आरोप है कि ऑनलाइन बुकिंग के बाद उन्हें अलग-अलग तरह के मैसेज मिल रहे हैं, जिनमें स्पष्टता का अभाव है। उदाहरण के तौर पर—
“Dear Customer, your refill is already booked and will be delivered shortly…”
“Pls avoid repeated calls & have patience…”
“Booking reference will be sent shortly…”
इन संदेशों में एकरूपता नहीं होने से उपभोक्ता भ्रमित हो रहे हैं और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर गैस कब मिलेगी।
🗣️ संवाददाता का अनुभव:
जिला ब्यूरो हरिराम देवांगन ने बताया कि उन्हें स्वयं पिछले 36 दिनों से गैस नहीं मिली है, जबकि कई बार ऑनलाइन बुकिंग और मिस कॉल करने के बावजूद केवल मैसेज मिल रहे हैं, लेकिन सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो रही।
उन्होंने यह भी बताया कि एजेंसी से संपर्क करने पर स्पष्ट जानकारी देने के बजाय फिर से ऑनलाइन बुकिंग करने की सलाह देकर टाल दिया जाता है।
❓ सबसे बड़ा सवाल: सच कौन बोल रहा है?
स्थिति को देखते हुए बड़ा सवाल उठ रहा है कि—
क्या वास्तव में गैस की कमी नहीं है?
या फिर एजेंसियों में कृत्रिम कमी (आर्टिफिशियल शॉर्टेज) बनाई जा रही है?
क्या कहीं कालाबाजारी की आशंका तो नहीं?
जब देश में पर्याप्त गैस उपलब्ध होने के दावे किए जा रहे हैं, तो फिर एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें क्यों लग रही हैं?
⚠️ प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल:
स्थानीय लोगों का आरोप है कि—
खाद्य विभाग और जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस निरीक्षण या सत्यापन नहीं किया जा रहा!
एजेंसियों में हो रही अव्यवस्था पर निगरानी का अभाव है!
जिससे उपभोक्ताओं की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
📢 जनता की मांग:
उपभोक्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि—
गैस एजेंसियों का तत्काल निरीक्षण किया जाए!
गैस की उपलब्धता का भौतिक सत्यापन हो!
उपभोक्ताओं को स्पष्ट और सही जानकारी दी जाए!
कालाबाजारी की आशंका की जांच की जाए!
🔎 निष्कर्ष:
रसोई गैस जैसी आवश्यक वस्तु की अनुपलब्धता आम जनता के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर राहत देने के लिए क्या कदम उठाता है।














