
₹2.02 लाख का कंप्यूटर, ₹1.38 लाख की मिठाई… टंडवा पंचायत के खर्चों का हिसाब कौन देगा?
रंगमंच और बोरवेल के बाद कंप्यूटर-प्रिंटर व मिठाई खरीदी पर उठे सवाल; बिल, मात्रा, दर और वितरण रिकॉर्ड की जांच जरूरी
संवाददाता: धीरेंद्र कुमार जायसवाल
रायपुर/तिल्दा-नेवरा। ग्राम पंचायत टंडवा में शासकीय राशि से किए गए खर्चों को लेकर सवालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रंगमंच निर्माण और बोरवेल से जुड़े खर्चों के बाद अब करीब ₹2.02 लाख के कंप्यूटर-प्रिंटर और ₹1 लाख 38 हजार 500 रुपए की मिठाई खरीदी चर्चा के केंद्र में है।
पंचायत से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों और सामने आई जानकारियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सिर्फ राशि खर्च होने का नहीं, बल्कि क्या खरीदा गया, किस दर पर खरीदा गया, किससे खरीदा गया, कितना खरीदा गया और उसका वितरण या उपयोग किस तरह हुआ, इसका पूरा रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं—इस पर है।
₹2.02 लाख की खरीदी, लेकिन कंप्यूटर का मॉडल कौन-सा? पंचायत रिकॉर्ड के अनुसार करीब ₹1.70 लाख के कंप्यूटर और ₹32 हजार के प्रिंटर की खरीदी का उल्लेख सामने आया है।

अब सवाल उठ रहा है कि कंप्यूटर किस कंपनी और मॉडल का है? उसमें कौन-सा प्रोसेसर, कितनी रैम और कितनी स्टोरेज है? प्रिंटर का मॉडल क्या है? दोनों की वारंटी कितनी है और उस समय बाजार में इनकी कीमत क्या थी?
यदि मूल बिल, तकनीकी स्पेसिफिकेशन, वारंटी कार्ड और बाजार मूल्य की तुलना सामने आ जाए तो खरीदी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
₹1.38 लाख की मिठाई—कितनी खरीदी, किस दर पर? राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर ₹1,38,500 की मिठाई खरीदी का उल्लेख सामने आने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है।
यहां सबसे बड़ा सवाल है—मिठाई की कुल मात्रा कितनी थी और प्रति किलो कितनी दर से खरीदी गई?
उदाहरण के तौर पर यदि ₹200 प्रति किलो की दर मानें तो ₹1,38,500 में करीब 692.5 किलो यानी लगभग 6.93 क्विंटल मिठाई आती है। लेकिन यह केवल गणितीय उदाहरण है। वास्तविक मात्रा का पता संबंधित बिल, वजन पर्ची और खरीदी रिकॉर्ड से ही चलेगा।
सात हजार आबादी का हिसाब भी जांच का विषय
यदि उदाहरण के तौर पर पंचायत क्षेत्र की आबादी 7 हजार मानी जाए और प्रत्येक व्यक्ति को 50 ग्राम मिठाई देने की गणना की जाए तो करीब 350 किलो मिठाई की आवश्यकता होगी।
ऐसे में सवाल यह नहीं कि गणित क्या कहता है, बल्कि सवाल यह है कि वास्तव में कितनी मिठाई खरीदी गई और कितने लोगों तक पहुंची?
क्या लाभार्थियों या वितरण का कोई रजिस्टर है? क्या वितरण की सूची तैयार हुई? क्या मिठाई प्राप्त करने का कोई रिकॉर्ड रखा गया?
तीन औद्योगिक संस्थानों से भी मिठाई मिलने की चर्चा
पंचायत क्षेत्र के आसपास स्थित तीन औद्योगिक संस्थानों से राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर मिठाई उपलब्ध कराए जाने की जानकारी भी सामने आ रही है।
यदि यह जानकारी दस्तावेजों से पुष्ट होती है तो सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि संस्थानों से मिली मिठाई और पंचायत द्वारा खरीदी गई मिठाई का हिसाब अलग-अलग रखा गया या नहीं?
कितनी मिठाई संस्थानों से मिली? कितनी पंचायत ने खरीदी? कुल कितनी मिठाई वितरित हुई? और अतिरिक्त खरीदी की आवश्यकता किस आधार पर तय की गई?
पूर्व कार्यकाल की खरीदी पर भी आमने-सामने दावे:
सरपंच प्रतिनिधि कृष्णा वर्मा का कहना है कि पूर्व सरपंच के कार्यकाल में भी करीब एक लाख रुपए की मिठाई खरीदी जाती थी और उस समय इस पर सवाल नहीं उठाए गए।
दूसरी ओर, प्राप्त जानकारी में पूर्व पंचवर्षीय कार्यकाल में करीब 40 किलो मिठाई खरीदे जाने की बात सामने आई है।
यदि संबंधित दस्तावेज इस जानकारी की पुष्टि करते हैं तो दोनों दावों में अंतर दिखाई देता है। ऐसे में पूर्व और वर्तमान कार्यकाल के बिल, भुगतान, मात्रा और वितरण रिकॉर्ड का मिलान जरूरी हो जाता है।
अब पंचायत से चाहिए इन सवालों के जवाब:
1. ₹1,38,500 की मिठाई खरीदी का प्रस्ताव कब पारित हुआ?
2. खरीदी की स्वीकृति किस अधिकारी या स्तर से मिली?
3. मिठाई किस फर्म या दुकानदार से खरीदी गई?
4. प्रति किलो दर क्या थी?
5. कुल कितनी मिठाई खरीदी गई?
6. भुगतान किस दस्तावेज के आधार पर किया गया?
7. कितने लोगों में मिठाई वितरित की गई?
8. वितरण रजिस्टर या अन्य प्रमाण उपलब्ध है?
9. औद्योगिक संस्थानों से प्राप्त मिठाई का रिकॉर्ड कहां है?
10. कंप्यूटर और प्रिंटर का वास्तविक मॉडल व बाजार मूल्य क्या है?
नोटिस के बाद बढ़ी विभागीय जांच की उम्मीद:
मामले में संबंधित CEO की ओर से ग्राम पंचायत सचिव को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब निगाह इस बात पर है कि नोटिस में किन बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है और सचिव की ओर से क्या जवाब दिया जाता है।
यदि विभाग बिल, वाउचर, प्रस्ताव, स्वीकृति, तकनीकी विवरण, बाजार मूल्य, मिठाई की मात्रा और वितरण रिकॉर्ड का मिलान करता है तो पूरे मामले की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।
सवाल बड़ा है—शासकीय राशि का पूरा हिसाब कहां है? फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी वित्तीय अनियमितता की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन जिस तरह अलग-अलग खर्चों को लेकर सवाल सामने आ रहे हैं, उससे दस्तावेजी सत्यापन और विभागीय जांच का महत्व बढ़ गया है।
टंडवा पंचायत में मुद्दा केवल ₹1.38 लाख की मिठाई का नहीं है। मुद्दा यह है कि जनता के पैसे से होने वाले हर खर्च का प्रस्ताव से भुगतान और भुगतान से उपयोग तक पूरा हिसाब क्या पारदर्शी तरीके से दर्ज है?
अब जवाब दस्तावेज देंगे, दावे नहीं।
पड़ताल जारी…
टंडवा पंचायत से जुड़े खर्चों की पड़ताल जारी है। उपलब्ध दस्तावेजों, पंचायत के जवाब और विभागीय जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मामला केवल प्रक्रिया और पारदर्शिता से जुड़े सवालों तक सीमित है या जांच में किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि भी होती है।






















