
बगदई अंग्रेजी शराब दुकान में ओवररेटिंग का खेल! 120 की गोवा 130 में, 760 की बोतल 800 में बिकने का आरोप
मदिरा प्रेमियों की जेब पर खुलेआम डाका? निर्धारित कीमत से अधिक वसूली की शिकायत, आबकारी अधिकारी की चुप्पी पर उठे सवाल
बगदई/तिल्दा। शासन द्वारा निर्धारित दरों पर शराब बिक्री सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आबकारी विभाग की है, लेकिन जब सरकारी शराब दुकान में ही निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे वसूलने के आरोप लगने लगें, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे? बगदई स्थित अंग्रेजी मदिरा दुकान में कथित ओवररेटिंग को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि दुकान में खुलेआम निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूली जा रही है और विरोध करने पर ग्राहकों को कथित तौर पर रूखे व्यवहार और धमकियों का सामना करना पड़ता है।
120 रुपये की गोवा 130 में, 760 की बोतल 800 रुपये में! स्थानीय स्तर पर सामने आई शिकायतों के अनुसार, 120 रुपये निर्धारित मूल्य वाली गोवा शराब को 130 रुपये में बेचे जाने का आरोप है। यानी प्रत्येक नग पर 10 रुपये अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं। इसी तरह 760 रुपये कीमत वाली शराब की बोतल के लिए 800 रुपये मांगे जाने की बात कही जा रही है। ग्राहकों का आरोप है कि कुछ ब्रांडों पर 40 से 50 और 60 रुपये तक अतिरिक्त राशि वसूली जाती है।

यदि ये आरोप सही हैं, तो यह केवल कुछ रुपयों का मामला नहीं, बल्कि रोजाना शराब खरीदने वाले सैकड़ों ग्राहकों की जेब पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।
‘पैसा है तो शराब लो, नहीं तो वापस जाओ’… क्या यही है ग्राहकों के साथ व्यवहार?
सबसे चिंताजनक बात केवल ओवररेटिंग नहीं, बल्कि ग्राहकों के साथ कथित व्यवहार भी है। शिकायतों के अनुसार, जब कोई ग्राहक निर्धारित मूल्य पर शराब देने की बात करता है तो उसे कथित रूप से यह कहकर टाल दिया जाता है कि लेना है तो लो, नहीं तो वापस जाओ।
आखिर सरकारी मदिरा दुकान में ग्राहक के साथ इस तरह का व्यवहार कितना उचित है?
कई ग्राहक दूर-दराज के गांवों से अपनी जेब में निर्धारित रकम लेकर शराब खरीदने पहुंचते हैं। उन्हें उम्मीद रहती है कि सरकारी दुकान में निर्धारित मूल्य पर सामान मिलेगा। लेकिन यदि काउंटर पर तय कीमत से अधिक पैसे मांगे जाएं, तो उनके सामने भी असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती है। कई बार उन्हें वापस लौटना पड़ता है तो कई बार दूसरे लोगों से पैसे मांगने तक की नौबत आ जाती है।
सोचने वाली बात है कि मेहनत की कमाई लेकर दुकान पहुंचने वाला आम व्यक्ति आखिर ऐसी परेशानी क्यों झेले?
आबकारी अधिकारी की चुप्पी पर सवाल, आखिर किसका संरक्षण? बगदई अंग्रेजी शराब दुकान में कथित ओवररेटिंग को लेकर सबसे बड़ा सवाल आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर खड़ा हो रहा है। यदि दुकान में निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूली जा रही है, तो इसकी जांच और रोकथाम की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या आबकारी विभाग को इसकी जानकारी नहीं है? क्या नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता? या फिर शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं?
हालांकि, किसी अधिकारी या दुकान संचालक की मिलीभगत का कोई प्रमाण सामने आए बिना संरक्षण का आरोप सिद्ध नहीं माना जा सकता, लेकिन इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
प्रशासन से मांग : बिल और सीसीटीवी की हो जांच:
मामले में शासन-प्रशासन और आबकारी विभाग से मांग है कि बगदई अंग्रेजी मदिरा दुकान की तत्काल जांच कराई जाए। बिक्री के दौरान ग्राहकों से ली जा रही राशि और निर्धारित मूल्य का मिलान किया जाए। साथ ही बिलिंग रिकॉर्ड, बिक्री रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए।
यदि निर्धारित दर से अधिक वसूली की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
आखिर सवाल यह है कि सरकारी शराब दुकान में ही यदि निर्धारित मूल्य का पालन नहीं होगा, तो नियमों का पालन कौन करवाएगा?
आम जनता को राहत देने और व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आबकारी विभाग को अब जवाब देना चाहिए। क्योंकि मामला केवल 10, 40 या 60 रुपये का नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास और सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही का है।
जनता का सवाल साफ है—शराब दुकान में रेट लिस्ट सिर्फ दीवार पर लगाने के लिए है या उस पर अमल भी होगा?





















