
श्री कृष्ण गौशाला चांपा में श्रद्धा के साथ मनाया गया हलषष्ठी व्रत
पीठ पर पोता मारकर माताओं ने बच्चों को दिया आशीर्वाद, तालाब पूजन के साथ सुनी हलषष्ठी व्रत कथा
चांपा। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी नगर के प्राचीन श्री कृष्ण गौशाला परिसर में 2 सितंबर, बुधवार को हलषष्ठी (खमरछठ) व्रत एवं पूजा का आयोजन हर्षोल्लास और धार्मिक आस्था के साथ किया गया। आयोजन में नगर एवं आसपास क्षेत्र की बड़ी संख्या में व्रती माताएं शामिल हुईं।

व्रती माताओं ने वरुण देव एवं माता हलषष्ठी का आवाहन करते हुए तालाब पूजन किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद हलषष्ठी व्रत कथा का श्रवण किया। पारंपरिक मान्यता के अनुसार पूजा के दौरान माताओं ने अपने बच्चों की पीठ पर पोता मारकर उन्हें आशीर्वाद दिया और उनकी सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की।
बलराम जयंती से जुड़ा है हलषष्ठी पर्व
कथा वाचक पंडित अभिषेक पाण्डेय ने हलषष्ठी व्रत कथा का सार बताते हुए कहा कि हरछठ अथवा हलषष्ठी व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इसे भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन षष्ठी माता की पूजा कर विभिन्न प्रकार के अनाज एवं पारंपरिक सामग्री का भोग अर्पित किया जाता है।

उन्होंने बताया कि हलषष्ठी व्रत में कई पारंपरिक नियमों का पालन किया जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन हल से जुताई कर उगाई गई फसलों और सब्जियों का सेवन नहीं किया जाता। तालाब में उगने वाली वस्तुओं, जैसे तीनी का चावल, करमुआ का साग तथा छह प्रकार की भाजी का सेवन करने की परंपरा है। व्रत में गाय के दूध और दही को वर्जित माना जाता है, जबकि भैंस के दूध और दही का पूजा एवं प्रसाद में विशेष महत्व बताया गया।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई पूजा
श्री कृष्ण गौशाला के पावन प्रांगण में वरुण देव एवं माता हलषष्ठी की वैदिक पूजा पंडित अभिषेक पाण्डेय एवं पंडित आदर्श पाण्डेय द्वारा विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराई गई। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने परिवार एवं संतान की मंगलकामना करते हुए धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया।
कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां भी जोरों पर
इस अवसर पर गौशाला के महाराजजनों ने बताया कि आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर श्री कृष्ण गौशाला परिसर में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर एवं परिसर की आकर्षक साज-सज्जा के साथ जन्मोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
उन्होंने श्रद्धालु भक्तजनों से जन्माष्टमी के पावन अवसर पर गौशाला पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करने एवं प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया।
— जय जोहार छत्तीसगढ़
संवाददाता: हरी देवांगन


















