
संवाददाता: राजू पाल/अष्टमी व रामनवमी की छुट्टी में हथबंद पंचायत पहुंचे अधिकारी, सचिव प्रभार को लेकर विवाद गरमाया
हथबंद/ सिमगा – अष्टमी और रामनवमी जैसे शासकीय अवकाश के दिन ग्राम पंचायत हथबंद में अधिकारियों के पहुंचने और सचिव प्रभार को लेकर की गई कार्रवाई ने विवाद खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले पर सवाल उठाए हैं।
बताया जा रहा है कि 10 मार्च को कलेक्टर जनदर्शन में ग्राम पंचायत के सचिव के खिलाफ आवेदन दिया गया, जिसके बाद उसी दिन बिना जांच के ही दूसरे सचिव को प्रभार सौंपने का आदेश जारी कर दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर पहले से ही असंतोष बना हुआ था।
इसी बीच 26 मार्च (रामनवमी) के दिन, जो कि शासकीय अवकाश था, अधिकारी हथबंद पंचायत पहुंचे और सरपंच-सचिव की अनुपस्थिति में पंचायत भवन में लिखापढ़ी की गई। इसे लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी और बढ़ गई है।
जनपद पंचायत के सीईओ मनहरे से दूरभाष पर संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि “मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है, मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।”
वहीं पंचायत पहुंचे सहायक करारोपण अधिकारी दुर्गेश साहू ने बताया कि वे जनपद सीईओ के आदेश पर यहां पहुंचे हैं।
⚖️ लगातार तबादलों से बढ़ी परेशानी:
इस मामले में शिवसेना ने भी हस्तक्षेप करते हुए कलेक्टर एवं जिला सीईओ को ज्ञापन सौंपकर सचिव के तबादले पर रोक लगाने की मांग की है।
शिवसेना प्रदेश सचिव ईश्वर प्रसाद निषाद ने बताया कि
“ग्राम पंचायत हथबंद में एक वर्ष के भीतर पांच बार सचिव बदले जा चुके हैं, जिससे पंचायत संचालन प्रभावित हो रहा है। एससी वर्ग से निर्वाचित महिला सरपंच को भी कामकाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।”
उन्होंने कहा कि पंचायत के पंचों और ग्रामीणों ने लिखित रूप से सहयोग मांगा है, जिसके आधार पर 16 मार्च को उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया था।
🚨 आंदोलन की चेतावनी:
शिवसेना नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सचिव के लगातार तबादलों पर रोक नहीं लगाई गई तो
👉 सीईओ कार्यालय का घेराव
👉 पुतला दहन
जैसे आंदोलन किए जाएंगे।
📝 मुख्य सवाल:
बिना जांच के सचिव परिवर्तन का आदेश क्यों?
शासकीय अवकाश के दिन पंचायत में कार्रवाई कैसे हुई?
अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास क्यों?








