
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/ तिल्दा नेवरा में जानलेवा हमला: FIR में 4 नाम, प्रेस विज्ञप्ति से एक आरोपी गायब, पुलिस पर उठे सवाल
तिल्दा नेवरा/ रायपुर (ग्रामीण) | विशेष रिपोर्ट
रायपुर जिले के तिल्दा नेवरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ओटगन में हुए गंभीर मारपीट के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। पीड़ित पक्ष ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) से निष्पक्ष जांच, गंभीर धाराएं जोड़ने और सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

📌 सुबह तालाब जाते समय हुआ हमला:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 16 मार्च 2026 की सुबह करीब 5 बजे ग्राम ओटगन निवासी उदल यदु तालाब में स्नान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे आरोपी कुलेश्वर यदु, चतुर यदु, थानेश्वर यदु और सेतराम यदु ने उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

🚑 गंभीर रूप से घायल, कई फ्रैक्चर:
हमले में उदल यदु को गंभीर चोटें आईं। उनके दोनों पैर और एक हाथ में फ्रैक्चर हुआ है। दोनों पैरों का ऑपरेशन हो चुका है, जबकि हाथ का ऑपरेशन 23 मार्च को प्रस्तावित है।
बीच-बचाव करने पहुंची यामिनी यदु (19 वर्ष) को भी आरोपियों ने पीटा, जिससे उनके बाएं पैर में गंभीर फ्रैक्चर हुआ है।
⚖️ हल्की धाराओं में केस दर्ज, उठे सवाल:
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना जानलेवा और गंभीर होने के बावजूद थाना तिल्दा नेवरा ने मामले को हल्का दिखाते हुए BNS की धारा 296, 115(2), 351(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है, जो पर्याप्त नहीं है।
❗ FIR और प्रेस विज्ञप्ति में अंतर:
मामले में नया विवाद तब सामने आया जब थाना द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में सेतराम यदु का नाम गायब पाया गया, जबकि FIR में चारों आरोपियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। इससे पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
😨 पीड़ित परिवार को मिल रही धमकियां:
पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपी खुलेआम कह रहे हैं — “थाना हमारी मुट्ठी में है, नेता-मंत्री हमारे साथ हैं” — और लगातार धमकी दे रहे हैं। इससे परिवार दहशत में है।
🗣️ थाना प्रभारी ने कहा:
थाना प्रभारी रमाकांत तिवारी ने इसे दोनों पक्षों का मामला बताते हुए काउंटर रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने FIR की कॉपी देने से इनकार करते हुए कहा कि यह ऑनलाइन उपलब्ध है।
अधिक जानकारी के लिए उच्च अधिकारियों से संपर्क करने पर भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला और मामला थाना स्तर का बताते हुए कॉल समाप्त कर दी गई।
📢 पीड़ित पक्ष की मांग:
पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) से मांग की है कि—
निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए!
मामले में गंभीर धाराएं जोड़ी जाएं!
सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो!
परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए!
🔎 अब आगे क्या?
यह मामला पुलिस कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है।








