
संपादक धीरेंद्र कुमार जायसवाल/भ्रष्टाचार की मास्टररोल बनी बनीकोडर, मनरेगा के नाम पर सरकारी धन की खुली लूट
मजदूर नदारद, फिर भी पोर्टल पर ‘फुल अटेंडेंस’…
खबर छपने के बाद भी जिम्मेदार बेखौफ….
बनीकोडर/बाराबंकी।
विकास खंड बनीकोडर की ग्राम पंचायतों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। रोजगार देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना को कागजों में ‘मजदूरों का मेला’ दिखाकर सरकारी धन की खुली लूट की जा रही है, जबकि जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है।
स्थिति यह है कि कार्यस्थलों पर मजदूर दिखाई नहीं देते, लेकिन ऑनलाइन पोर्टल पर सैकड़ों मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर सरकारी खजाने से भुगतान निकाला जा रहा है।
अंकों का खेल धरातल पर शून्य, पोर्टल पर फुल:
ताजा मामला ग्राम पंचायत फतेहगंज का है।
शुक्रवार (26 दिसंबर) को मौके पर निरीक्षण के दौरान एक भी मजदूर कार्य करता नहीं मिला, लेकिन इसके बावजूद 106 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कर दी गई।
शनिवार को जब दोबारा पड़ताल की गई तो केवल 25 मजदूर मौके पर मौजूद मिले, जबकि शाम होते-होते पोर्टल पर यह संख्या बढ़ाकर 72 कर दी गई।
मीडिया की सुर्खियों के बाद भी जारी फर्जीवाड़ा:
हैरानी की बात यह है कि मामला सार्वजनिक होने और मीडिया में सुर्खियां बनने के बावजूद जिम्मेदारों के हौसले कम नहीं हुए। रविवार (28 दिसंबर) को एक बार फिर 83 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कर दी गई। यह न केवल भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है, बल्कि शासन की पारदर्शिता नीति को भी खुली चुनौती है।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल:
क्षेत्र में चर्चा है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। जब साक्ष्य खुले तौर पर सामने हैं, तो संबंधित अधिकारी कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहे हैं? क्या कागजी मजदूरों के नाम पर निकाला जा रहा धन किसी संगठित सिंडिकेट की जेब में जा रहा है?
तकनीक बनी भ्रष्टाचार छिपाने का हथियार:
मनरेगा में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन हाजिरी, एनएमएमएस और फेस स्कैनिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई थीं, लेकिन बनीकोडर में तकनीक का उपयोग भ्रष्टाचार को ढकने के लिए किया जा रहा है।
कानूनी कार्रवाई का प्रावधान:
फर्जी हाजिरी लगाना मनरेगा अधिनियम, 2005 और भारतीय दंड संहिता / भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध है—
1. मनरेगा अधिनियम की धारा 25:
नियमों के उल्लंघन पर दोष सिद्ध होने की स्थिति में जुर्माना।
2. आपराधिक धाराएं (धोखाधड़ी व गबन):
धारा 420 – धोखाधड़ी!
धारा 409 – लोक सेवक द्वारा विश्वासघात!
➡️ गबन की गई पूरी राशि की वसूली दोषियों से की जाती है।
3. विभागीय कार्रवाई:
ग्राम रोजगार सहायक (GRS) या अन्य संविदा कर्मियों की सेवा समाप्ति!
सचिव, सरपंच और संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई!
प्रशासन से कार्रवाई की मांग:
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो, ताकि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को लूट का जरिया बनने से रोका जा सके।








