
संपादक धीरेंद्र कुमार जायसवाल/ 06.55 करोड़ का धान घोटाला: सिस्टम फेल या संगठित लूट?
कोनपारा उपकेंद्र में वर्षों पुरानी गड़बड़ी उजागर, एक गिरफ्तार — बाकी अब भी फरार
छत्तीसगढ़ | जशपुर–तुमला | विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। थाना तुमला क्षेत्रांतर्गत धान खरीदी उपकेंद्र कोनपारा (तुमला) में खरीफ वर्ष 2024–25 के दौरान 06 करोड़ 55 लाख 26 हजार 979 रुपये की भारी अनियमितता का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में ही यह स्पष्ट हो गया है कि यह घोटाला किसी एक कर्मचारी की करतूत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संगठित मिलीभगत का नतीजा है।
छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) जशपुर के नोडल अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4), 320, 336, 338 एवं 61 के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले में खरीदी केंद्र के प्राधिकृत अधिकारी सहित कुल 6 लोगों को आरोपी बनाया गया है, लेकिन अब तक केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी हो सकी है, जबकि मुख्य पदों पर बैठे आरोपी अब भी फरार हैं।
आंकड़े जो सिस्टम की पोल खोलते हैं
संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट के अनुसार—
कुल खरीदी दर्शाई गई: 1,61,250 क्विंटल धान
मिलों/संग्रहण केंद्रों को परिदान: 1,40,663.12 क्विंटल
अंतर (गायब धान): 20,586.88 क्विंटल
भौतिक सत्यापन के दौरान मौके पर यह धान मौजूद ही नहीं मिला, जिससे साफ है कि धान कागजों में खरीदा गया, ज़मीन पर कभी आया ही नहीं।
कुल वित्तीय नुकसान:
धान मूल्य (₹3100 प्रति क्विंटल): ₹6,38,19,328
बारदाना (4,898 नग): ₹17,07,651
कुल घोटाला: ₹6,55,26,979
यह राशि सीधे-सीधे राज्य शासन के खजाने पर चोट है।
कौन-कौन हैं आरोपी?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी—
भुनेश्वर यादव – प्राधिकृत अधिकारी
जयप्रकाश साहू – समिति प्रबंधक
शिशुपाल यादव – फड़ प्रभारी (गिरफ्तार)
जितेंद्र साय – कंप्यूटर ऑपरेटर
अविनाश अवस्थी – सहायक फड़ प्रभारी
चंद्र कुमार यादव – उप सहायक फड़ प्रभारी
सभी पर आपसी मिलीभगत से धान, बारदाना और भुगतान में हेराफेरी का गंभीर आरोप है।
एक गिरफ्तारी, कई बड़े सवाल:
पुलिस ने फड़ प्रभारी शिशुपाल यादव (39 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है, लेकिन इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं—
क्या 06.55 करोड़ का घोटाला अकेला फड़ प्रभारी कर सकता है?
कंप्यूटर एंट्री, भुगतान, परिदान और स्टॉक की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी?
प्राधिकृत अधिकारी और समिति प्रबंधक अब तक गिरफ्त से बाहर क्यों?
सिर्फ एक गिरफ्तारी से यह मामला “बलि का बकरा” बनाकर रफा-दफा करने की आशंका भी पैदा कर रहा है। अपेक्स बैंक और प्रशासन की भूमिका भी कटघरे में
घोटाला खरीफ 2024–25 का है, जबकि एफआईआर 02 जनवरी 2026 को दर्ज की गई।
सवाल यह है—
इतनी बड़ी गड़बड़ी समय रहते क्यों नहीं पकड़ी गई?
नियमित ऑडिट और ऑनलाइन मॉनिटरिंग केवल कागजों तक सीमित थी क्या?
अगर जांच पहले होती तो करोड़ों का नुकसान बच सकता था।
पुलिस का पक्ष:
एसएसपी जशपुर शशि मोहन सिंह का कहना है—
“अपेक्स बैंक के नोडल अधिकारी की रिपोर्ट पर एफआईआर दर्ज की गई है। एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, शेष की तलाश जारी है।”
हालांकि, ज़मीनी हकीकत यह है कि मुख्य जिम्मेदार अब भी फरार हैं।
निष्कर्ष: किसान बनाम सिस्टम:
धान खरीदी व्यवस्था किसानों के हित में बनाई गई थी, लेकिन कोनपारा घोटाला बताता है कि यह सिस्टम कुछ लोगों के लिए कमाई का संगठित नेटवर्क बन चुका है।
जब तक—
ऊपर से नीचे तक जवाबदेही तय नहीं होगी,
पूरे नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी,
और सिर्फ छोटे कर्मचारियों को ही निशाना बनाया जाता रहेगा, तब तक ऐसे करोड़ों के धान घोटाले सामने आते रहेंगे — और हर बार नुकसान किसान और राज्य की जनता को ही उठाना पड़ेगा।








