
तिल्दा नेवरा- संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल की कलम से
चुप्पी…
हाँ, वही चुप्पी—जो अन्याय की सबसे मज़बूत ढाल है।
वही खामोशी—जो अत्याचारियों के हौसलों को पंख देती है।
जब समाज का सज्जन वर्ग मौन धारण कर लेता है,
तब ज़ालिम निडर हो जाता है।
जब सच बोलने वाले पीछे हट जाते हैं,
तब झूठ मंच पर ताज पहनकर बैठ जाता है।
अमेरिकी चिंतक Howard Washington Thurman ने चेताया था—
“दुनिया बुरे लोगों की बुराई से नहीं, बल्कि अच्छे लोगों की चुप्पी से बर्बाद होती है।”
यह कोई साधारण कथन नहीं—यह आत्मा को झकझोर देने वाली पुकार है।
✍️ मेरी कलम का संकल्प:
मैं, धीरेंद्र कुमार जायसवाल,
अपनी कलम को हथियार नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ मानता हूँ।
मेरी स्याही भय से नहीं, सत्य से बहती है।
मेरे शब्द बिकते नहीं, झुकते नहीं, रुकते नहीं।
पत्रकारिता मेरे लिए नौकरी नहीं—
यह संघर्ष है।
यह संकल्प है।
यह समाज के प्रति उत्तरदायित्व है।
जब कोई मजलूम न्याय की उम्मीद में दरवाज़ा खटखटाता है,
तो मेरी कलम उसकी आवाज़ बनती है।
जब सत्ता सवालों से बचती है,
तो मेरा हर शब्द एक सवाल बनकर गूंजता है।
🔥 क्रांति का असली अर्थ:
🔵 क्रांति पत्थर उठाने में नहीं,
सच उठाने में है।
🔵 क्रांति भीड़ के पीछे चलने में नहीं,
भीड़ के सामने खड़े होकर सच बोलने में है।
🔵 क्रांति नफरत की आग नहीं,
जागरूकता की मशाल है।
🔵 क्रांति व्यवस्था को जलाना नहीं,
व्यवस्था को सुधारना है।
⚡ उठो, बोलो, बदलो!
🔴 डर की बेड़ियाँ तोड़ो।
🔴 मौन का त्याग करो।
🔴 अन्याय के सामने झुको मत।
🔴 सच को सच कहने का साहस रखो।
🔵 सवाल पूछो—क्योंकि सवाल ही लोकतंत्र की सांस हैं। याद रखो—
जब तुम बोलते हो, तो केवल आवाज़ नहीं उठती,
एक नई सुबह जन्म लेती है।
✊ अंतिम उद्घोष
अगर कलम झुकी, तो समाज टूटेगा।
अगर आवाज़ थमी, तो अन्याय बढ़ेगा।
इसलिए आज प्रण लो—
खामोशी नहीं, प्रतिकार होगा।
डर नहीं, सत्य का उद्घोष होगा।
भीड़ नहीं, विचारों की क्रांति होगी।
✊🔥
इंकलाब शब्दों से शुरू होता है,
और बदलाव साहस से पूरा होता है।
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