
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/ मतदाता सूची से वैध नाम हटाने पर कांग्रेस का तीखा हमला
“घोर लापरवाही और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार”
अम्बिकापुर।
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से कथित रूप से वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। इस गंभीर मुद्दे पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले को “घोर लापरवाही” तथा “लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला” करार दिया है।
कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई। पार्टी ने कहा कि ऑनलाइन फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर एक वर्ग विशेष के मतदाताओं को “मृत” या “अन्यत्र स्थानांतरित” दर्शाते हुए उनके नाम विलोपित करने की अनुशंसा की गई, जबकि वे आज भी जीवित हैं और उसी क्षेत्र में निवासरत हैं।

1143 वैध मतदाताओं के नाम काटने की कोशिश का दावा: कांग्रेस नेताओं के अनुसार, अब तक शहर में 1143 वैध मतदाताओं की पहचान की गई है, जिनके नाम नियम-विरुद्ध तरीके से मतदाता सूची से हटाने का प्रयास किया गया। पार्टी ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो पूरे जिले में यह संख्या कई हजार तक पहुंच सकती है।
“नियमों की उड़ाई गई धज्जियां”
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि जिन मतदाताओं के नाम हटाने की अनुशंसा की गई है, उनमें
निर्वाचित पार्षद/ पूर्व पार्षद/ बूथ-स्तरीय कार्यकर्ता
शासकीय सेवाओं में कार्यरत कर्मचारी भी शामिल हैं, जो आज भी संबंधित वार्डों में निवास कर रहे हैं। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि निर्वाचन नियमों के अनुसार फॉर्म-7 भरने वाला व्यक्ति उसी मतदान केंद्र का मतदाता होना चाहिए, जबकि अधिकांश मामलों में यह मूल शर्त ही पूरी नहीं की गई।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें:
कांग्रेस ने निर्वाचन तंत्र से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए निम्न बिंदुओं पर जोर दिया—
नियम-विरुद्ध भरे गए सभी फॉर्म-7 तत्काल निरस्त किए जाएं।
पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए।
दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
भविष्य में केवल नियमसम्मत आवेदनों को ही स्वीकार किया जाए।
वैध मतदाताओं के नाम हटने से रोकने के लिए सख्त सुरक्षा एवं निगरानी तंत्र लागू हो।
पार्टी ने यह भी चेतावनी दी कि जानबूझकर गलत जानकारी देकर फॉर्म-7 भरने वालों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने की पहल की जाएगी।
“लोकतंत्र की आधारशिला पर चोट”_
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में शहर कांग्रेस अध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल थे। नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की आधारशिला है, और किसी भी वैध नागरिक का नाम हटना उसके संवैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल:
इस पूरे मामले पर समाचार लिखे जाने तक निर्वाचन अधिकारियों की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। प्रशासनिक पक्ष स्पष्ट होने के बाद ही वस्तुस्थिति सामने आएगी, लेकिन फिलहाल स्थानीय स्तर पर बढ़ते असंतोष ने निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों की राय:
चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित निवारण तंत्र की कमी के चलते ऐसे विवाद उत्पन्न होते हैं। अब सबकी निगाहें प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।








