
✍️ मेरे कलम पर मुझे घमंड है… क्योंकि मैं सच्चाई लिखता हूँ
मुझे अपने कलम पर गर्व है —
क्योंकि यह न बिकता है, न झुकता है,
यह केवल सच लिखता है।
अक्सर मुझसे पूछा जाता है —
“इतनी हिम्मत कहां से आती है?”
जब मैं मज़लूमों के हक़ और अधिकार के लिए आवाज़ उठाता हूँ।
तो मेरा जवाब साफ़ है —
हिम्मत उन आंसुओं से आती है
जो अन्याय के बोझ तले दबे लोगों की आंखों से बहते हैं।
हिम्मत उन सिसकियों से आती है
जो व्यवस्था की चुप्पी में खो जाती हैं।
जब धमकी भरे शब्दों में कहा जाता है —
“उठवा दूंगा…”
तो मैं निडर होकर कहता हूँ —
जिस दिन ऊपर वाला उठाएगा,
उस दिन न आवाज़ आएगी,
न सोचने का मौका मिलेगा।
तकलीफ़ों से जूझते मज़लूमों के घावों पर
जब मेरी कलम मरहम बनती है,
तो आत्मविश्वास अपने-आप बढ़ जाता है।
और उसी आत्मविश्वास से
और बड़ी लड़ाई लड़ने का साहस पैदा होता है।
अपने लिए तो हर कोई जीता है,
लेकिन एक बार दूसरों के लिए जी कर देखिए —
तब एहसास होगा
कि दूसरों की जीत में
कितनी सच्ची खुशी छिपी होती है।
यही मेरी सोच है,
यही मेरा संकल्प है,
और यही मेरे मन की बात।
— संवाददाता
धीरेन्द्र कुमार जायसवाल








