
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल…..✍️ कलम और कर्तव्य: देश के नाम एक संकल्प
तिल्दा नेवरा। जिस तरह एक फौजी भारत की आन, बान और शान के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर देता है,
देश की रक्षा में मर-मिटने से भी पीछे नहीं हटता —
ठीक उसी तरह एक सच्चा पत्रकार भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटता।
वह बंदूक नहीं उठाता,
पर उसकी कलम की स्याही अन्याय के खिलाफ सबसे बड़ी ताकत बन जाती है।
वह सीमा पर नहीं खड़ा होता,
लेकिन समाज के भीतर छिपे भ्रष्टाचार, माफिया, शोषण और अत्याचार के खिलाफ मोर्चा संभाले रहता है।
🔴 फौजी देश की सीमाओं की रक्षा करता है।
🖋️ पत्रकार लोकतंत्र की सीमाओं की रक्षा करता है।
एक सैनिक गोलियों का सामना करता है,
तो एक पत्रकार धमकियों, दबाव और झूठे मुकदमों का।
फिर भी वह निडर होकर सच लिखता है —
गरीब, मजलूम और पीड़ितों की आवाज बनकर।
⚡ सच्चा पत्रकार किसी सत्ता, दल या व्यक्ति का नहीं,
बल्कि जनता और देश का सिपाही होता है।
अगर अन्याय के खिलाफ बोलना गुनाह है,
तो यह गुनाह हर सच्चा पत्रकार करता रहेगा —
क्योंकि उसका धर्म है जागरूकता,
उसका संकल्प है क्रांतिकारी बदलाव,
और उसका लक्ष्य है समाज को सही दिशा देना।
फौजी और पत्रकार —
दोनों ही देश के असली प्रहरी हैं।
एक सीमा पर खड़ा है,
दूसरा सच्चाई की चौकी पर।
✊🖋️ यही है पत्रकारिता का असली अर्थ —
निडर रहना, सच लिखना और देश के साथ खड़ा रहना।








