
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/ कलम और समाज सेवा को मिला अपना आशियाना,सम्मान, सुरक्षा और सुविधा एक साथ, देशभर में चर्चा का विषय बनी विश्राम गृह पहल…!
पत्रकारों व सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए ऐतिहासिक पहल
सोच जो बदले व्यवस्था—प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन की मिसाल
पत्रकारों व सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए नई सोच की नींव
रायपुर । पत्रकारों व सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए नई सोच की नींव प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन की पहल पर देशभर में चर्चा पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में एक नई और दूरदर्शी पहल की नींव रखते हुए प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के संस्थापक मनोज पांडे ने पत्रकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए विश्राम गृह की आधारशिला रखी है।
यह पहल न केवल प्रदेश बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए संस्थापक मनोज पांडे ने कहा कि “पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता समाज की रीढ़ होते हैं। दिन-रात जनहित और सामाजिक सरोकारों के लिए काम करने वाले इन लोगों के लिए ठहरने की एक सुरक्षित, सम्मानजनक और व्यवस्थित व्यवस्था होना अत्यंत आवश्यक है। हमारी संस्था ने इसी सोच के साथ यह विश्राम गृह समाज को समर्पित किया है।” उन्होंने आगे कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन समाज के बीच रहकर न केवल आवाज़ उठाने का काम कर रही है, बल्कि ज़मीन पर ठोस सुविधाएँ भी उपलब्ध करा रही है। “सोशल एक्टिविस्ट और पत्रकारों के लिए कुछ कर पाना ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है,” ऐसा उनका मानना है।
पत्रकारिता और समाज सेवा को मिला सम्मान:
विश्राम गृह की यह अवधारणा उन पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए संबल बनेगी, जो सीमित संसाधनों के बावजूद निष्पक्ष पत्रकारिता और निस्वार्थ समाज सेवा में जुटे रहते हैं। यह पहल पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा और सुविधा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
नई मिसाल, नई प्रेरणा:
पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच इस पहल को “कलम के सिपाहियों और समाज के सच्चे प्रहरी के लिए सम्मानजनक आश्रय” के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में अन्य राज्यों और संगठनों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।
प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन की यह पहल यह संदेश देती है कि जब सोच सकारात्मक हो और उद्देश्य जनहित का हो, तो समाज में वास्तविक बदलाव संभव है।








