
रायपुर (छत्तीसगढ़) — संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल
“दीवारें अगर बोलतीं, तो सत्ता की चुप्पी शर्म से झुक जाती…”
सन् 2022, रायपुर सेंट्रल जेल — पत्रकार कुमार जितेन्द्र के जीवन का एक और अध्याय, जिसने छत्तीसगढ़ में सत्ता और सत्य के टकराव को उजागर किया।
उन्होंने लिखा — “अंबिकापुर की दीवारों ने मुझे सच दिखाया था, रायपुर की दीवारों ने मुझे सिस्टम की रूह दिखाई।”
यह वही दौर था जब पुलिस परिवार अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलित थे। आंदोलन की गूंज राजधानी तक पहुँची और सत्ता के गलियारों में बेचैनी फैल गई। पत्रकार कुमार जितेन्द्र, जिन्होंने पहले भी पुलिस परिवारों की आवाज़ बुलंद की थी, अब खुद सत्ता के निशाने पर थे।
रात ढाई बजे दरवाज़ा टूटा, और आज़ादी की सांसें थम गईं। करीब 25–30 पुलिस गाड़ियों का घेरा, 15–20 अधिकारी, और एक ही आदेश — “उन्हें चुप करो।”
जितेन्द्र के शब्दों में — “इस बार कोई नक़ाब नहीं था, सिर्फ सत्ता का हुक्म और पुलिस की वफ़ादारी।”
उन्हें रायपुर लाया गया। आरोप?
धारा 151, 107/16 — जन आंदोलन को अपराध घोषित करने की कोशिश।
उन्होंने मुस्कराते हुए कहा —
“जब सच कागज़ पर कैद लिखा जाए, समझ लो कलम सही जगह चोट कर रही है।”
जेल की दीवारें और सत्ता का सन्नाटा:
रायपुर सेंट्रल जेल में हर ईंट सत्ता की नीयत बयाँ कर रही थी। कैदियों की फुसफुसाहट, अफ़सरों की ठंडी नज़रें और अदृश्य दबाव की दीवारें…
पर कुमार जितेन्द्र ने तय किया — “अब बोलना नहीं, लिखना है — चाहे दीवारों पर ही क्यों न सही।”
14 जनवरी 2022 को जमानत मिली, लेकिन संघर्ष खत्म नहीं हुआ।
बाहर निकले तो किसी ने कहा — “अब छोड़ दो ये सब।” उनका जवाब था —
“अगर सच बोलने की सज़ा जेल है, तो मिशन सही है।”
विश्व पत्रकारिता जगत में हलचल:
उनकी गिरफ्तारी पर Committee to Protect Journalists (CPJ) — अमेरिका स्थित प्रतिष्ठित संस्था — ने रिपोर्ट जारी की, जिसमें इसे “अवैध गिरफ्तारी” बताया गया।
देश के प्रमुख अंग्रेज़ी मीडिया हाउसों ने इसे सुर्ख़ियों में जगह दी।
राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया, और अंततः सरकार को झुकना पड़ा।
लेकिन कहानी यहीं नहीं थमी —
8 अप्रैल 2022 को सत्ता फिर लौटी, और दीवारें फिर बंद हुईं।
“कैद में भी कलम लिखती रही इंक़लाब की दास्तां,
सच की जो लौ जली, उसे बुझा न सकी सत्ता की आँधियां।”
यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं,
यह कहानी उस कलम की है —
जो जेल की दीवारों में भी झुकती नहीं,
क्योंकि वह सच की रखवाली करती है।
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल— रिपोर्ट : जय जोहार सीजी न्यूज़















