
तिल्दा नेवरा (रायपुर) —संपादक धीरेंद्र कुमार जायसवाल। नगर में अपराध की परछाई इतनी गहरी हो चुकी है कि अब कानून की रौशनी भी धुंधली लगने लगी है।
सूत्रों के अनुसार तिल्दा ओवरब्रिज के पास खुलेआम सट्टे का खेल चल रहा है। 12:00 बजते ही अवैध सट्टों का कारोबार शुरू होता है। हार–जीत के ठहाके गूंजते हैं और प्रशासन की आँखें जैसे बंद सी हो जाती हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ये सब कुछ पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है। शिकायतें कई बार दर्ज कराई गईं, मगर कार्रवाई सिर्फ कागज़ों में रह गई।
नशे की जड़ें गहराईं – युवा पीढ़ी दलदल में:
जुएं के साथ-साथ नशे का कारोबार भी तेजी से फैल रहा है। शराब, गांजा और नशीले पदार्थों का अवैध व्यापार खुलेआम चल रहा है।
स्कूल-कॉलेज के युवा इसकी चपेट में आकर धीरे-धीरे बर्बादी की ओर बढ़ रहे हैं। देर रात मोहल्लों में संदिग्ध लोगों की आवाजाही आम बात हो गई है, जिससे क्षेत्र में दहशत और असुरक्षा का माहौल है।
गुंडागर्दी और डर का राज:
स्थानीय लोगों का कहना है कि अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे दिन-दहाड़े वसूली, धमकी और मारपीट तक करने से नहीं डरते।
शहर के कई हिस्सों में लोगों ने बताया कि पुलिस गश्त तो होती है, पर अपराधी उससे पहले ही खबरदार हो जाते हैं — मानो किसी को पहले से भनक मिल जाती हो।
जनता के सवाल — “आखिर कब जागेगा प्रशासन?”
नागरिकों ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर पुलिस और प्रशासन सच्ची नीयत से कदम उठाए तो 24 घंटे में यह जुएं और नशे का नेटवर्क ध्वस्त किया जा सकता है।
लोगों ने चेतावनी दी है —
“अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई, तो हम आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।” तिल्दा नेवरा की जनता अब खामोश नहीं रहेगी।
“हर गली में खौफ़ है, हर मोड़ पे सन्नाटा,
जुएं की गूंज में डूबा है तिल्दा का हर डेटा।
अब बस एक उम्मीद — प्रशासन जागे रातों को,
वरना बर्बादी लिखी जाएगी इन हवाओं की बातों को।”
संपादक धीरेंद्र कुमार जायसवाल— रिपोर्ट : जय जोहार सीजी न्यूज़















