
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/ विनोद अग्रवाल उर्फ मग्गू सेठ अब तक फरार: भईरा की आत्महत्या के बाद प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठे सवाल
बलरामपुर, 07 मई 2025:
विनोद अग्रवाल उर्फ मग्गू सेठ के खिलाफ लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों और ज़मीन कब्जाने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में थाना राजपुर में दर्ज नई एफआईआर (क्रमांक: 0103, दिनांक 06/05/2025) में भी उन पर धमकी और ज़मीन हड़पने के आरोप लगे हैं, जिसके चलते राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र भईरा ने आत्महत्या कर ली। इसके बावजूद मग्गू सेठ अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जो कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
वर्तमान स्थिति:
06 मई को दर्ज एफआईआर के अनुसार, मग्गू सेठ ने पीड़ित भईरा को ज़मीन विवाद में लगातार धमकाया, जिससे मानसिक दबाव में आकर उसने आत्महत्या कर ली। जनता के आक्रोश के बाद प्रशासन ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू की, लेकिन अभियुक्त अब तक फरार है।

आपराधिक इतिहास:
मग्गू सेठ के खिलाफ 2009 से 2024 तक विभिन्न थानों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें प्रमुख मामले हैं:
क्रेशर हत्याकांड (मार्च 2022): संलिप्तता संदिग्ध, जांच में बाधा डालने के आरोप।
नवंबर 2024, पहाड़ी कोरवा समुदाय: फर्जी रजिस्ट्री व 14 लाख के चेक (सं. 768085) से धोखाधड़ी का आरोप।
राजपुर थाना प्रकरण:
अपराध सं. 48/09 (मारपीट, बलवा)
133/15 (अपहरण)
SC/ST एक्ट के अंतर्गत अपराध सं. 07/17
बरियों चौकी प्रकरण:
32/18 व 34/21 (लापरवाही से मृत्यु)
85/21 (बंधक बनाना)
जिला बदर प्रक्रिया पर सवाल:
स्थानीय नागरिकों ने आश्चर्य जताया कि इतने गंभीर मामलों और बार-बार दर्ज हुई FIRs के बावजूद मग्गू सेठ पर जिला बदर की कार्रवाई क्यों नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि “बोटी नुमा रुपये” यानी अवैध धन के बल पर उन्होंने प्रशासनिक तंत्र को प्रभावित किया है।
ED जांच की संभावना:
उनकी संपत्तियाँ Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2022 के तहत Proceeds of Crime की श्रेणी में आ सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो Enforcement Directorate (ED) उनकी संपत्तियों को अटैच कर सकती है। मगर इस दिशा में प्रगति अभियुक्त की गिरफ्तारी पर निर्भर करती है।

सामाजिक प्रतिक्रिया:
पहाड़ी कोरवा समुदाय और भईरा के समर्थकों ने जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए और तत्काल गिरफ्तारी की माँग की। एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है:
“मग्गू सेठ का आतंक क्षेत्र में बढ़ता जा रहा है। यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो लोगों का प्रशासन पर से भरोसा उठ जाएगा।”
निष्कर्ष:
मग्गू सेठ की फरारी और प्रशासन की निष्क्रियता जनता में असुरक्षा और आक्रोश पैदा कर रही है। पुरानी शिकायतों और नई FIR के बावजूद गिरफ्तारी न होना गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जा रही है। अब सवाल है—क्या मग्गू सेठ को कभी न्याय के कटघरे में लाया जा सकेगा?
इस विषय पर हम आपको आगे भी अपडेट देते रहेंगे।















