
बट सावित्री पूजा: सुहागिनें सावित्री बन पति की दीर्घायु के लिए कर रहीं निर्जला व्रत
छत्तीसगढ़/ छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में सुहागिन महिलाओं द्वारा श्रद्धा और आस्था के साथ बट सावित्री पूजा मनाई जा रही है। यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि वट अर्थात बरगद वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का स्थायी वास होता है, इसलिए महिलाएं इसी वृक्ष के नीचे बैठकर अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
सुहागिन महिलाएं सावित्री स्वरूप धारण कर भीषण गर्मी में निर्जला उपवास रखते हुए पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रही हैं। महिलाएं दुल्हन की तरह सोलह श्रृंगार कर बरगद वृक्ष के चारों ओर रक्षा सूत्र बांधते हुए सात बार परिक्रमा करती हैं तथा जल, कच्चा दूध, दही, नारियल, भीगा चना, गुड़, मिठाई और फल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने इसी वट वृक्ष के नीचे कठोर तपस्या कर यमराज से संघर्ष करते हुए अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण यह पर्व पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
छत्तीसगढ़ में इस पर्व को पारंपरिक रूप से “बरसाईत पूजा” के नाम से भी जाना जाता है। बरसात के आगमन से पहले मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति पूजा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। मान्यता है कि बरगद वृक्ष दीर्घायु का प्रतीक है, जिसकी आयु 150 से 200 वर्ष तक होती है, इसलिए इस पूजा में इसका विशेष महत्व माना गया है।
इस वर्ष बट सावित्री पूजा का पर्व सोमवती अमावस्या और शनि जन्मोत्सव के विशेष संयोग में मनाया जा रहा है, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ गई है। महिलाओं ने सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण और पाठ कर अपने परिवार की खुशहाली एवं पति की चिरायु होने की कामना की।
जय जोहार सीजी न्यूज़ | संवाददाता – हरिराम देवांगन | चांपा, छत्तीसगढ़














