
राजिम संगम घाट में फैली गंदगी पर उठे सवाल, क्या यही है पर्यावरण संरक्षण का संदेश?
राजिम/गरियाबंद। राजिम प्रदेश की धार्मिक नगरी एवं तीर्थराज के नाम से प्रसिद्ध राजिम का पावन संगम घाट इन दिनों भारी गंदगी और प्रदूषण की चपेट में नजर आ रहा है। जहां एक ओर यह संगम जन-जन की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है, वहीं दूसरी ओर घाट के हर छोर पर फैली गंदगी प्रशासनिक लापरवाही और पर्यावरण संरक्षण के दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
संगम घाट पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छता, पवित्रता और बेहतर सुविधाओं की अपेक्षा रहती है, लेकिन वर्तमान हालात इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रहे हैं। नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक फैली गंदगी यह दर्शाती है कि प्रदेश के प्राकृतिक जल स्रोत लगातार प्रदूषण और उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति कोई नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से घाट की सफाई और संरक्षण को लेकर जिम्मेदार विभागों द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई गई है।
बारिश के मौसम में जब नदी का जलस्तर बढ़ेगा, तब यही गंदगी बहकर आगे प्राकृतिक पर्यावरण और नदी की सुंदरता को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। इसके बावजूद जल संसाधन विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है।
धार्मिक आस्था को भी किया जा रहा नजरअंदाज:
राजिम नगर को धार्मिक नगरी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां स्थित राजीव लोचन मंदिर और त्रिवेणी संगम प्रदेशवासियों की गहरी आस्था का केंद्र है। यह संगम प्रदेश के “प्रयाग” के रूप में भी पहचान रखता है, जहां अस्थि विसर्जन, पिंडदान और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रदेश ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इसके बावजूद संगम घाट में फैली गंदगी को हटाने और क्षेत्र की नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में प्रशासन का उदासीन रवैया लोगों में नाराजगी पैदा कर रहा है। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने मांग की है कि संगम घाट की तत्काल सफाई कर नियमित निगरानी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि धार्मिक आस्था और प्राकृतिक पर्यावरण दोनों की रक्षा हो सके।
संवाददाता – हरिराम देवांगन
जय जोहार सीजी न्यूज़















