
संपादक धीरेंद्र कुमार जायसवाल/चरागाह भूमि उद्योग को देने के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध तेज, 59 साल की लीज पर सवाल
तिल्दा-नेवरा (रायपुर)।
ग्राम पंचायत देवरी, तहसील तिल्दा-नेवरा, जिला रायपुर की सार्वजनिक चरागाह भूमि खसरा नंबर 443/1-2 को अग्रसेन स्टील प्राइवेट लिमिटेड को 59 वर्षों की लीज पर देने के प्रस्ताव के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। ग्रामीणों ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह अवैधानिक बताते हुए शासन-प्रशासन से तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ग्राम पंचायत की अनुमति और बिना किसी वैध एनओसी (NOC) के इस चरागाह भूमि को उद्योग के लिए आबंटित करने की जानकारी सामने आई है, जो ग्राम अधिकारों और कानून दोनों के विपरीत है।
ग्राम सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित:
ग्रामीणों के अनुसार 30 जनवरी 2026 को ग्राम देवरी में विधिवत ग्राम सभा आयोजित की गई, जिसमें लगभग 393 ग्रामीण, सरपंच एवं पंचगण उपस्थित रहे। ग्राम सभा में अग्रसेन स्टील प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित प्लांट के खिलाफ सर्वसम्मति से विरोध दर्ज किया गया और ग्राम सभा रजिस्टर में लिखित प्रस्ताव पारित किया गया।

ग्राम सभा में स्पष्ट किया गया कि—
ग्राम पंचायत द्वारा न तो पूर्व में कोई NOC जारी की गई है और न भविष्य में की जाएगी
उक्त भूमि ग्राम की सार्वजनिक चरागाह भूमि है, जो पशुपालकों एवं ग्रामीणों की आजीविका से सीधे जुड़ी है
भूमि उपयोग में परिवर्तन से पर्यावरण, सामाजिक एवं आर्थिक संतुलन पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा
जनसुनवाई को लेकर भी आपत्ति:
ग्रामीणों ने बताया कि जनपद पंचायत कार्यालय से सूचना प्राप्त हुई है कि इस परियोजना को लेकर 27 फरवरी 2026 को ग्राम घुलघुल में जनसुनवाई प्रस्तावित है, जिसे ग्राम देवरी क्षेत्र में भी आयोजित किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सभा के स्पष्ट विरोध के बावजूद यदि जनसुनवाई कराई जाती है, तो इससे गांव में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।
प्रशासन को सौंपा ज्ञापन:
इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) तिल्दा-नेवरा, तहसीलदार तिल्दा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जनपद पंचायत को लिखित ज्ञापन सौंपते हुए प्रस्तावित जनसुनवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया कि जल्द ही पर्यावरण विभाग एवं कलेक्टर, जिला रायपुर को भी ज्ञापन सौंपकर पूरी प्रक्रिया पर जवाब और ठोस कार्रवाई की मांग की जाएगी।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों की मांग है कि—
सार्वजनिक चरागाह भूमि को उद्योग को देने की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए
27 फरवरी 2026 की प्रस्तावित जनसुनवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए
30 जनवरी 2026 को पारित ग्राम सभा प्रस्ताव को पूर्ण रूप से मान्य किया जाए
पूरे मामले की कानूनी एवं प्रशासनिक जांच कराई जाए
ग्रामीणों ने दोहराया कि वे चरागाह भूमि, पर्यावरण और ग्राम अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण और संगठित संघर्ष जारी रखेंगे।








