
संपादक धीरेंद्र कुमार जायसवाल/ सरगुजा संभाग में ACB का अब तक का सबसे बड़ा वार, 65 हजार की रिश्वत लेते उपायुक्त व वरिष्ठ सहायक गिरफ्तार
ठेकेदार से सत्यापन व समयवृद्धि के नाम पर वसूली, फिनाफ्थलीन टेस्ट में रिश्वत साबित
सरगुजा | अम्बिकापुर। विशेष रिपोर्ट
सरगुजा संभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और सनसनीखेज ट्रैप कार्रवाई में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने आवास एवं पर्यावरण मंडल (छ.गृ.नि.मं.) संभाग अम्बिकापुर के उपायुक्त (अधीक्षण अभियंता) पूनम चन्द्र अग्रवाल और उनके कार्यालय में पदस्थ वरिष्ठ सहायक ग्रेड–02 अनिल सिन्हा को 65 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से पूरे संभाग के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
ठेकेदार से सत्यापन के नाम पर रिश्वत:
प्रार्थी रवि कुमार, जो ठेकेदारी का कार्य करते हैं, ने 20 जनवरी 2026 को ACB में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार वर्ष 2023 में नवीन तहसील भवन, दौरा कुंडली (जिला बलरामपुर) तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, लुंडा में अतिरिक्त कक्ष निर्माण कार्य उन्होंने विधिवत निविदा प्रक्रिया के तहत पूर्ण कराया था। निर्माण पूर्ण होने के बाद भौतिक सत्यापन एवं अंतिम समयवृद्धि अनुमोदन के एवज में रिश्वत की मांग की गई।
पहले 60 हजार, फिर 70; सौदा 65 हजार में तय
शिकायत के सत्यापन में सामने आया कि दोनों कार्यों के लिए पहले 60 हजार रुपये की मांग की गई। 5 फरवरी 2026 को ट्रैप की योजना बनी। कार्यालय पहुंचने पर वरिष्ठ सहायक अनिल सिन्हा ने राशि बढ़ाकर 70 हजार बताई, बाद में सौदेबाजी के बाद 65 हजार रुपये पर सहमति बनी।
फिनाफ्थलीन पाउडर से जाल:
ACB ने पंचनामा तैयार कर 65 हजार रुपये को फिनाफ्थलीन पाउडर से चिह्नित किया। यह राशि वरिष्ठ सहायक अनिल सिन्हा को दी गई, जिसने 5 हजार रुपये अपने पास रखे और 60 हजार रुपये उपायुक्त पूनम चन्द्र अग्रवाल को उनके कक्ष में सौंप दिए।
इशारा मिलते ही दबिश:
प्रार्थी के संकेत पर ट्रैप दल ने तत्काल दबिश दी। उपायुक्त से 60 हजार और वरिष्ठ सहायक से 5 हजार रुपये बरामद किए गए। दोनों आरोपियों के हाथ धुलवाने पर फिनाफ्थलीन टेस्ट पॉजिटिव आया, जिससे रिश्वत लेना सिद्ध हुआ।
पीसी एक्ट के तहत केस:
दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7 एवं 12 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
भ्रष्ट व्यवस्था पर सवाल:
इस कार्रवाई ने सरकारी निर्माण और अनुमोदन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इस ट्रैप से ठेकेदारों और आम नागरिकों में यह भरोसा भी जगा है कि शिकायत करने पर भ्रष्टाचारियों तक कानून का हाथ पहुंचता है।








