
तिल्दा नेवरा।
नगर की शासकीय मदिरा दुकान में इन दिनों ओवररेट वसूली का खेल खुलेआम चलने का आरोप सामने आ रहा है। शराब खरीदने पहुंचे उपभोक्ताओं का कहना है कि निर्धारित मूल्य से ₹10 से ₹20 तक अधिक राशि वसूली जा रही है। जब कोई मदिरा प्रेमी अधिक कीमत पर सवाल उठाता है, तो जवाब में उसे “ज्यादा बात मत कर” जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई एक-दो दिन की बात नहीं, बल्कि 10-15 दिनो से चल रही नियमित व्यवस्था बन चुकी है। दुकान में कार्यरत सेल्समैन और सुपरवाइजर खुलेआम अधिक दाम वसूल रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि–
➡️ आबकारी विभाग के अधिकारी और उड़नदस्ता आखिर मौन क्यों हैं?
➡️ प्लेसमेंट कंपनी की भूमिका क्या है?
➡️ क्या यह सब किसी संरक्षण में हो रहा है?
सूत्रों की मानें तो संकेत सुपरवाइजर और जिम्मेदार अधिकारियों की ओर जाते हैं। यदि बिना संरक्षण के यह संभव नहीं है, तो फिर संरक्षण देने वाला कौन है? यह सवाल अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
नियमों के अनुसार शासकीय मदिरा दुकानों में निर्धारित एमआरपी से अधिक वसूली अपराध की श्रेणी में आती है, बावजूद इसके न कोई कार्रवाई, न कोई जांच—यह प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अब देखना यह होगा कि
✔️ आबकारी विभाग कब संज्ञान लेता है
✔️ उड़नदस्ता कब सक्रिय होता है
✔️ या फिर यह “ओवररेट का खेल” यूँ ही चलता रहेगा
जनता की मांग:
तिल्दा नेवरा की जनता ने जिला प्रशासन और आबकारी विभाग से तत्काल जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि आम उपभोक्ताओं की जेब पर हो रही इस खुली डकैती पर रोक लग सके।








