
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/ अस्पताल विवाद ने पकड़ा तूल, जांच पर असर डालने के आरोप
बलरामपुर। वाड्रफनगर स्थित 100 बिस्तर अस्पताल में चल रहा विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। अस्पताल में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ और चिकित्सकों के बीच बढ़ते मतभेद ने विभागीय जांच का रूप ले लिया है। विवाद की जड़ में सिविल अस्पताल वाड्रफनगर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेमंत दीक्षित हैं, जिन पर छत्तीसगढ़ प्रदेश नर्सेस एसोसिएशन ने पद के दुरुपयोग और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए हैं।
🔹 नर्सिंग एसोसिएशन ने उठाई थी मांग:
जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ प्रदेश नर्सेस एसोसिएशन की प्रांताध्यक्ष श्रीमती सुमन शर्मा द्वारा 23 सितंबर 2025 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) बलरामपुर को पत्र भेजा गया था।
पत्र (क्रमांक 474) में उल्लेख किया गया कि डॉ. दीक्षित अस्पताल में कार्यरत महिला नर्सों और स्टाफ के साथ अनुचित व्यवहार कर रहे हैं, जिससे कार्य वातावरण बिगड़ गया है।
एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासनिक नियमों की अनदेखी करते हुए मनमानी स्थानांतरण और ड्यूटी चार्ट में मनमाने बदलाव किए गए। इस पत्र के आधार पर CMHO कार्यालय ने 3 अक्टूबर 2025 को जांच के आदेश जारी किए (पत्र क्रमांक 2442) तथा डॉ. प्रेमचंद बनर्जी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।
🔹 9 अक्टूबर को हुई जिला स्तरीय जांच:
9 अक्टूबर 2025 को जिला स्तरीय जांच समिति वाड्रफनगर पहुँची और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए।
नर्सिंग स्टाफ, चिकित्सक और अन्य कर्मचारियों ने अपने-अपने पक्ष रखे।
हालांकि, जांच के दौरान एक नया विवाद खड़ा हो गया। अस्पताल कर्मियों ने आरोप लगाया कि डॉ. दीक्षित ने अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए जांच को प्रभावित करने की कोशिश की।
🔹 स्टाफ का आरोप — “जांच निष्पक्ष नहीं रही”
नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि शिकायत सिविल अस्पताल वाड्रफनगर से संबंधित थी, लेकिन जांच के दौरान प्रभारी अधिकारी ने अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों को भी बयान के लिए बुलाया, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं।
एक कर्मचारी ने बताया —
“हमने कई बार अनुचित व्यवहार की शिकायत की, लेकिन डॉ. दीक्षित की पहुँच के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बार भी जांच दबाव में की जा रही है।”
🔹 एसोसिएशन का रुख सख्त:
प्रांताध्यक्ष सुमन शर्मा और प्रांतीय सचिव एम. उर्मिला द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि जांच में पक्षपात पाया गया, तो नर्सिंग एसोसिएशन आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।
एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि यदि महिला स्टाफ के साथ अनुचित व्यवहार की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
🔹 रिपोर्ट जल्द सौंपे जाने की संभावना:
जांच समिति ने सभी पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं और रिपोर्ट तैयार कर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बलरामपुर को सौंपने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
🔹 स्टाफ की अपील — “निष्पक्ष जांच हो”
अस्पताल कर्मियों और नर्सिंग स्टाफ ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि —
“यह केवल एक व्यक्ति या पद का नहीं, बल्कि कार्यस्थल की गरिमा और महिला सुरक्षा से जुड़ा मामला है।”
मुख्य बिंदु :
💥 नर्सिंग एसोसिएशन ने प्रभारी अधिकारी को हटाने की मांग की।
💥 जिला स्तरीय समिति ने 9 अक्टूबर को की जांच।
💥 स्टाफ ने लगाया जांच प्रभावित करने का आरोप।
💥 रिपोर्ट जल्द CMHO बलरामपुर को सौंपी जाएगी।
💥 एसोसिएशन ने चेताया — पक्षपात हुआ तो होगा आंदोलन।








