
बलौदाबाजार ब्रेकिंग न्यूज़: श्री सीमेंट के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन, सभी गेट बंद
10 साल से मुआवजा और पुनर्वास की मांग लंबित होने का आरोप, एसडीएम के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने दी दोबारा आंदोलन की चेतावनी
करही/चण्डी, बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में श्री सीमेंट कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया। सोमवार सुबह ग्राम पंचायत करही और चण्डी के सैकड़ों महिला-पुरुष ग्रामीणों ने सुबह 7 बजे से कंपनी के सभी गेटों के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने कंपनी में आने-जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया, जिससे मजदूरों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
10 साल से मुआवजा नहीं मिलने का आरोप:
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि आदिवासियों की जमीन के मुआवजे का भुगतान पिछले 10 वर्षों से लंबित है। इसके अलावा पात्र ग्रामीणों को अब तक पुनर्वास का लाभ भी नहीं मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
कंपनी के सभी गेट बंद, परिवहन पर पड़ा असर:
ग्रामीणों ने कंपनी में काम करने जाने वाले मजदूरों को अंदर जाने से रोका। साथ ही क्लिंकर और सीमेंट के परिवहन के लिए आने-जाने वाले मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी बंद कर दी गई। इसके चलते कंपनी के कामकाज और परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी वर्षों पुरानी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
एसडीएम ने की ग्रामीणों और कंपनी प्रबंधन से चर्चा:
धरना-प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद एसडीएम मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों से बातचीत की और इसके बाद कंपनी प्रबंधन से चर्चा की। बातचीत के दौरान ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया कि 5 नवंबर तक संबंधित लोगों के बैंक खातों में मुआवजे की राशि जमा कर दी जाएगी।
वहीं, पुनर्वास के संबंध में बताया गया कि सूची में जिन पात्र लोगों के नाम दर्ज हैं, उन्हें पहले लाभ दिया जाएगा। इसके बाद शेष पात्र लोगों को लाभ देने की बात कही गई।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो परिवार सहित आंदोलन की चेतावनी: प्रशासन की ओर से मिले आश्वासन के बावजूद ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय-सीमा में उनकी मांगों पर अमल नहीं किया गया, तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर करही और चण्डी गांव के लोग अपने पूरे परिवार के साथ कंपनी के गेट के सामने धरने पर बैठेंगे।
अब आश्वासन पर अमल का इंतजार:
फिलहाल ग्रामीणों की प्रमुख मांग मुआवजे का भुगतान और पुनर्वास का लाभ दिलाना है। अब देखना होगा कि कंपनी प्रबंधन और शासन-प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार 5 नवंबर तक मुआवजे की राशि का भुगतान होता है या नहीं। वर्षों से लंबित इस मामले का समाधान ग्रामीणों को कब तक मिल पाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
जय जोहार सीजी न्यूज़
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