
कल से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ, घर-घर होगी मां दुर्गा की आराधना; जानिए घटस्थापना का मुहूर्त, पूजा विधि और सामग्री
रायपुर, छत्तीसगढ़। शक्ति की आराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ हो रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक पर्व में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करेंगे। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। घरों और मंदिरों में नवरात्रि की तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालु व्रत, दुर्गा सप्तशती पाठ, दीप प्रज्वलन और भजन-कीर्तन के माध्यम से माता की आराधना करेंगे।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त:
नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करना शुभ माना जाता है। रायपुर के लिए प्रकाशित पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को घटस्थापना का प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 5:58 बजे से 9:53 बजे तक बताया गया है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त लगभग सुबह 11:40 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक बताया गया है।
पंचांगों में मुहूर्त के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए श्रद्धालु पूजा करने से पहले स्थानीय पंचांग या मंदिर के पुजारी से समय की पुष्टि अवश्य कर लें।
घटस्थापना के लिए आवश्यक पूजा सामग्री:
नवरात्रि में कलश स्थापना करने के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है।
कलश स्थापना की सामग्री:
– मिट्टी या तांबे का कलश
– शुद्ध जल या गंगाजल
– नारियल और आम के पत्ते
– कलावा या मौली
– रोली, कुमकुम और अक्षत
– सुपारी और सिक्का
– कलश रखने के लिए थाली या पात्र
जौ बोने की सामग्री:
– मिट्टी का चौड़ा पात्र
– साफ मिट्टी
– जौ के बीज
– पानी छिड़कने के लिए छोटा लोटा
मां दुर्गा की पूजा सामग्री:
– मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा
– लाल चुनरी और फूलों की माला
– रोली, सिंदूर और अक्षत
– घी या तेल का दीपक
– रुई की बाती
– धूप, अगरबत्ती और कपूर
– फल, मिठाई और प्रसाद
– पंचामृत
– पूजा की थाली, घंटी और आसन
सामग्री की मात्रा परिवार की परंपरा और पूजा के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
कैसे करें कलश स्थापना? जानिए पूरी विधि
1. पूजा स्थल की सफाई करें:
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

2. जौ बोने की तैयारी करें:
एक साफ मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर जौ के बीज बोएं। ऊपर से थोड़ी मिट्टी डालें और हल्का पानी छिड़कें। इस पात्र को पूजा स्थल पर रखें। नवरात्रि के दौरान जौ में आवश्यकतानुसार पानी डालते रहें।

3. कलश तैयार करें:
कलश को साफ करके उस पर मौली बांधें। उसमें शुद्ध जल भरें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अक्षत, सुपारी और सिक्का डाल सकते हैं। कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल रखें। नारियल पर लाल कपड़ा या चुनरी बांधी जा सकती है।

4. विधि-विधान से घटस्थापना करें:
तैयार कलश को जौ वाले पात्र के पास या अपनी परंपरा के अनुसार निर्धारित स्थान पर स्थापित करें। मां दुर्गा का स्मरण करते हुए पूजा का संकल्प लें। इसके बाद मां दुर्गा का आह्वान कर पूजा प्रारंभ करें।

5. मां शैलपुत्री की पूजा करें:
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माता को रोली, अक्षत, फूल, चुनरी, धूप और दीप अर्पित करें। फल और मिठाई का भोग लगाएं तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

6. मंत्र जाप और आरती करें:
पूजा के दौरान मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं। अंत में मां दुर्गा की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
कलश स्थापना के समय कौन-सा मंत्र बोलें?
घटस्थापना के समय श्रद्धालु मां दुर्गा का स्मरण करते हुए इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।
ॐ दुं दुर्गायै नमः।
मां शैलपुत्री की पूजा के लिए मंत्र:
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
मंत्रों का जाप श्रद्धापूर्वक करें। विशेष वैदिक संकल्प या विस्तृत कर्मकांड करवाने के लिए स्थानीय पुरोहित का मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
नवरात्रि के नौ दिनों में किस देवी की पूजा होगी?
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।
1. प्रथम दिन – मां शैलपुत्री: घटस्थापना और प्रथम पूजा।
2. द्वितीय दिन – मां ब्रह्मचारिणी: तप, संयम और साधना की आराधना।
3. तृतीय दिन – मां चंद्रघंटा: साहस और शौर्य की उपासना।
4. चतुर्थ दिन – मां कूष्मांडा: ऊर्जा और सृजन की आराधना।
5. पंचम दिन – मां स्कंदमाता: ममता और कल्याण की कामना।
6. षष्ठम दिन – मां कात्यायनी: शक्ति और साहस की पूजा।
7. सप्तम दिन – मां कालरात्रि: भय से मुक्ति की प्रार्थना।
8. अष्टम दिन – मां महागौरी: सुख-शांति और कल्याण की कामना।
9. नवम दिन – मां सिद्धिदात्री: पूजा, हवन और कन्या पूजन की परंपरा।
नवरात्रि के दौरान अष्टमी, नवमी, हवन और कन्या पूजन की तिथि अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित करें।
नवरात्रि में किन बातों का रखें ध्यान?
– पूजा स्थल को साफ और पवित्र रखें।
– दीपक जलाते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें।
– जौ में आवश्यकतानुसार पानी डालें, लेकिन अधिक पानी न भरें।
– व्रत अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार रखें।
– कन्या पूजन के दौरान बच्चियों का सम्मान करें और स्वच्छता का ध्यान रखें।
– कलश विसर्जन, जवारा विसर्जन और हवन परिवार या मंदिर की परंपरा के अनुसार करें।
शक्ति, साधना और भक्ति का पर्व है नवरात्रि
शारदीय नवरात्रि केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि शक्ति, साधना, संयम और सामाजिक सद्भाव का संदेश भी देती है। नौ दिनों तक श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करेंगे। मंदिरों में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से भक्तिमय वातावरण देखने को मिलेगा।
जय जोहार सीजी न्यूज़, छत्तीसगढ़।






















