
सच्चा और ईमानदार पत्रकार – कलम का सिपाही, सच का प्रहरी
न बिके जो दौलत से, न झुके जो सत्ता के वार से,
वही पत्रकार पहचाना जाता है अपने सच्चे किरदार से।
सच की राह में कांटे हजार मिलेंगे हर कदम,
मगर कलम नहीं रुकेगी, जब तक होगा जनता का दम।
तिल्दा नेवरा। सच्चाई की राह कभी आसान नहीं होती। सच लिखने और सच दिखाने वाले पत्रकार को कई बार तरह-तरह की धमकियों, दबाव, झूठे आरोपों और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। फिर भी एक ईमानदार पत्रकार अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटता।
लोग क्या कहते हैं, कौन नाराज़ होता है या कौन साथ छोड़ देता है—इन सबकी परवाह किए बिना जनता के हित में सच्चाई को उजागर करना ही उसका धर्म और उसका कर्तव्य होता है।
हम मानते हैं कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है। इसलिए हमारी कलम हमेशा सत्य, न्याय और जनहित के लिए चलेगी।
“सच्चाई से लड़ने पर चाहे कितनी भी धमकियां मिलें, चाहे आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़े, फिर भी सत्य के मार्ग से पीछे नहीं हटेंगे। क्योंकि हमारा कर्तव्य और हमारा धर्म है—सच्चाई को उजागर करना।”
“सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।
सच दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं जा सकता।
हमारी कलम बिकेगी नहीं, झुकेगी नहीं, रुकेगी नहीं।”
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/9131419735














