
सुशासन तिहार 2026: व्यवस्था या सिर्फ ढिंढोरा? पिछले साल की अव्यवस्था फिर दोहराने का डर
फॉर्म की कमी से जूझे हजारों लोग, इस बार भी उठ रहे सवाल
जांजगीर-चांपा।
जिला उप मुख्यालय चांपा में इस वर्ष 1 मई से 10 जून तक आयोजित होने वाले सुशासन तिहार 2026 को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों और दावों की चर्चा शुरू हो गई है। शासन-प्रशासन स्तर पर बड़े-बड़े वादों के साथ प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, लेकिन पिछली बार की अव्यवस्थाएं अब भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।
बताते चलें कि पिछले वर्ष चांपा पालिका द्वारा भालेराव स्टेडियम स्थित भवन में सुशासन तिहार के तहत समाधान शिविर आयोजित किया गया था। यहां सीमित काउंटरों पर आम जनता से आवेदन लिए जा रहे थे, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों को निर्धारित फॉर्म तक उपलब्ध नहीं हो पाया। नतीजतन हजारों लोग अपनी समस्याएं लेकर इधर-उधर भटकते नजर आए।
पालिका प्रशासन द्वारा कुछ स्थानों पर फॉर्म वितरण की व्यवस्था जरूर की गई थी, लेकिन एक से अधिक समस्याओं के लिए अलग-अलग फॉर्म की आवश्यकता होने के बावजूद पर्याप्त संख्या में फॉर्म उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके चलते सैकड़ों लोग आवेदन जमा करने से वंचित रह गए। इतना ही नहीं, सादे कागज या टाइप किए गए आवेदन भी स्वीकार नहीं किए गए, जिससे हजारों लोगों के आवेदन हाथों में ही रह गए।
इस दौरान इंडोर हॉल में आयोजित शिविर में कई बार आम जनता और कर्मचारियों के बीच विवाद की स्थिति भी बनी, जो प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है।
🟨 पार्षदों की बेरुखी भी आई सामने
पिछले वर्ष आयोजित शिविर में क्षेत्र के 21 वार्ड पार्षदों की सक्रिय भूमिका अपेक्षित थी, लेकिन अधिकांश पार्षदों की अनुपस्थिति ने व्यवस्था को और कमजोर कर दिया। वार्डवासी फॉर्म के लिए भटकते रहे, लेकिन उन्हें उचित मार्गदर्शन और सहयोग नहीं मिल सका।
🟦 इस वर्ष क्या बदलेगा?
इस वर्ष 1 मई से 10 जून तक फिर से सुशासन तिहार आयोजित होने जा रहा है, लेकिन आम जनता में इसे लेकर उत्साह नजर नहीं आ रहा। पिछले अनुभवों के कारण लोगों में निराशा और अविश्वास की स्थिति साफ झलक रही है।
🔴 फॉर्म की कमी फिर बनेगी समस्या?
पिछले वर्ष सीमित मात्रा में फॉर्म उपलब्ध कराना प्रशासन की बड़ी कमजोरी रही। हर समस्या के लिए अलग फॉर्म अनिवार्य होने के कारण लोगों को एक से अधिक फॉर्म की जरूरत पड़ी, जो उपलब्ध नहीं हो सके। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं इस बार भी शिकायतों की संख्या कम रखने के लिए फॉर्म सीमित तो नहीं किए जाएंगे?
⚠️ पिछले आवेदन का क्या हुआ?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि पिछले वर्ष जमा किए गए हजारों आवेदनों का क्या निराकरण हुआ? इसकी कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ सकी। ऐसे में इस बार “त्वरित समाधान” के दावे कितने सफल होंगे, यह देखने वाली बात होगी।
🧾 निष्कर्ष: सुशासन तिहार का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन यदि मूलभूत व्यवस्थाएं ही दुरुस्त नहीं होंगी, तो यह आयोजन केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
अब देखना होगा कि इस बार प्रशासन पिछली गलतियों से सीख लेकर इसे जनहितकारी बना पाता है या नहीं।
संवाददाता – हरिराम देवांगन
जय जोहार सीजी न्यूज़, जांजगीर-चांपा
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