
तेलासी धाम में 38 लाख का घोटाला? सोलर लाइट प्रोजेक्ट पर बड़े सवाल, ग्रामीणों में आक्रोश
बलौदाबाजार (Jay Johar CG news)।
बलौदाबाजार जिले के धार्मिक एवं पवित्र स्थल तेलासीधाम में निर्माणाधीन गुरु अमरदास जलाशय के सौंदर्यीकरण कार्य में कथित तौर पर 38 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। सोलर स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में भारी अनियमितताओं के आरोपों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जलाशय परिसर में लगाई जा रही सोलर लाइट्स की खरीद और स्थापना में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई है। आरोप है कि ठेकेदारों द्वारा घटिया और लोकल क्वालिटी की लाइट्स को ब्रांडेड बताकर ऊंचे दामों में बिलिंग की गई। कागजों में एक सोलर लाइट की कीमत करीब 44,000 रुपये दिखाई गई है, जबकि बाजार में यही सामग्री 12,000 से 15,000 रुपये में उपलब्ध बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, कुल 81 लाइट्स के नाम पर लगभग 35.64 लाख रुपये का खर्च दर्शाया गया है। इस तरह प्रति यूनिट कीमत बढ़ाकर लाखों रुपये की संभावित हेराफेरी का मामला सामने आ रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि लगाई गई सोलर लाइट्स की गुणवत्ता बेहद खराब है। बैटरियां और सोलर पैनल मानकों के अनुरूप नहीं हैं और कई लाइट्स लगते ही खराब होने लगी हैं। तकनीकी नियमों की अनदेखी और घटिया इंस्टॉलेशन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस पूरे मामले ने टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या टेंडर निष्पक्ष रूप से जारी हुआ था? क्या गुणवत्ता जांच सही तरीके से हुई? या फिर अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से पूरा खेल रचा गया? ऐसे कई सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
घटना को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों और नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों ने स्वतंत्र तकनीकी जांच, सामग्री की गुणवत्ता ऑडिट, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और भविष्य में पारदर्शी निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन की यह चुप्पी लोगों के संदेह को और गहरा कर रही है।
✍️ संवाददाता: धीरेंद्र कुमार जायसवाल
📍 जय जोहार सीजी न्यूज़, छत्तीसगढ़
(नोट: यह समाचार स्थानीय स्रोतों व ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। आधिकारिक जांच के बाद तथ्यों में परिवर्तन संभव है।)














