
शासकीय जमीन पर कब्जा विवाद: बुलडोज़र कार्रवाई रुकी, राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से गरमाया अजीरमा मामला
सरगुजा में गरीबों पर सख्ती और प्रभावशाली पर नरमी के आरोप, वर्दीधारी कर्मचारी पर सवालों की बौछार
📍 अम्बिकापुर/सरगुजा | संवाददाता: धीरेंद्र कुमार जायसवाल
सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम अजीरमा में शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासनिक कार्रवाई के बीच अचानक बुलडोज़र रुकने और कथित राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों ने पूरे घटनाक्रम को विवादास्पद बना दिया है।
🔎 क्या है मामला?
न्यायालय अतिरिक्त तहसीलदार अम्बिकापुर-02 के आदेश के अनुसार ग्राम अजीरमा स्थित खसरा नंबर 74/1 की लगभग 2.480 हेक्टेयर शासकीय भूमि में से करीब 0.700 हेक्टेयर पर अवैध कब्जा पाया गया।
जांच में सामने आया कि उक्त भूमि पर पक्के-कच्चे मकानों का निर्माण, प्रीकास्ट बाउंड्री वॉल तथा कृषि कार्य (मक्का फसल) किया जा रहा था। शिकायतकर्ता के अनुसार कब्जा एक प्रधान आरक्षक द्वारा किया गया है, जो क्षेत्र का मूल निवासी नहीं है।
⚖️ प्रशासनिक कार्रवाई और आदेश:
अतिरिक्त तहसीलदार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि कब्जाधारी स्वयं अतिक्रमण हटाए, अन्यथा प्रशासन बलपूर्वक कार्रवाई करेगा। आदेश के बाद राजस्व अमला और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी के माध्यम से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू भी कर दी गई।
⚠️ अचानक क्यों रुकी कार्रवाई?
कार्रवाई के दौरान अचानक घटनाक्रम ने मोड़ ले लिया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बुलडोज़र चलने के बीच एक फोन कॉल के बाद अधिकारियों ने कार्रवाई रोक दी। बताया जा रहा है कि फोन पर कथित रूप से “सरगुजा सांसद लाइन पर हैं” कहा गया, जिसके बाद जेसीबी मशीन को वापस लौटा दिया गया।
हालांकि इस कॉल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इससे पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है।
🧾 गरीबों पर सख्ती, प्रभावशाली पर नरमी?
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि हाल के महीनों में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर कई गरीब परिवारों के मकान तोड़े, लेकिन इस मामले में कार्रवाई अधूरी छोड़ दी गई। इससे प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
🚨 विभागीय स्थिति भी सवालों में:
आरोपित प्रधान आरक्षक को लेकर विभागीय स्तर पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। जानकारी के अनुसार उनका तबादला अन्य जिले में किया जा चुका है, बावजूद इसके वे पुलिस लाइन में अटैच बताए जा रहे हैं। ड्यूटी से अनुपस्थिति और वेतन रोकने की प्रक्रिया की भी चर्चा है।
📜 कानून क्या कहता है?
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के तहत शासकीय भूमि पर अतिक्रमण पूर्णतः अवैध है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना, बेदखली और अन्य दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोपी सरकारी कर्मचारी हो, तो निष्पक्ष जांच और भी जरूरी हो जाती है।
❓ उठ रहे बड़े सवाल:
क्या कार्रवाई जानबूझकर रोकी गई?
क्या राजनीतिक दबाव में निर्णय बदला गया?
क्या अलग-अलग लोगों के लिए अलग कानून लागू हो रहा है?
क्या होगी उच्चस्तरीय जांच?
🧭 प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती:
अजीरमा का यह मामला अब केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासन की पारदर्शिता और कानून के समान अनुपालन की परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई से ही तय होगा कि आम जनता का भरोसा कायम रह पाता है या नहीं।













