
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/खबर के बाद बौखलाए थाना प्रभारी? आरोपों पर सफाई देने के बजाय पत्रकार को भेजा नोटिस
बलरामपुर | विशेष रिपोर्ट
जिले के बसंतपुर थाना क्षेत्र में पुलिस और पत्रकारिता के बीच टकराव का मामला सामने आया है। जिस थाना प्रभारी पर गंभीर आरोपों को लेकर समाचार प्रकाशित हुआ था, उसी थाना प्रभारी द्वारा अब संबंधित पत्रकार को ही नोटिस भेज दिया गया है। इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में कई सवाल खड़े हो रहे हैं और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव बनाने की कोशिश बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार हाल ही में प्रकाशित एक समाचार में बसंतपुर थाना प्रभारी पर चोरी के एक मामले में मुख्य आरोपियों को छोड़ने और अवैध वसूली करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। खबर सामने आने के बाद थाना प्रभारी की कार्यशैली को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई थी।
इसी खबर से नाराज होकर थाना प्रभारी द्वारा पत्रकार रामहरी गुप्ता को नोटिस जारी कर दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि भारत सम्मान चैनल और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित समाचार असत्य एवं भ्रामक है, जिससे एक शासकीय सेवक की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। नोटिस में तीन दिनों के भीतर थाना बसंतपुर में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं, अन्यथा वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
हालांकि इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस अधिकारी के खिलाफ आरोप लगे हैं, वही अधिकारी स्वयं नोटिस जारी कर रहे हैं। कानूनी जानकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोपों को गलत माना जा रहा है तो मामले की निष्पक्ष जांच उच्च अधिकारियों द्वारा कराई जानी चाहिए, न कि सीधे पत्रकार पर कार्रवाई कर दबाव बनाने की कोशिश की जाए।
पत्रकार संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि यदि किसी खबर में तथ्यात्मक त्रुटि है तो उसका जवाब जांच और साक्ष्यों के आधार पर दिया जाना चाहिए। नोटिस भेजकर पत्रकारों को डराने का प्रयास लोकतंत्र और स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए सही संकेत नहीं है।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि खबर गलत है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए। लेकिन जिस अधिकारी पर आरोप हैं, वही कार्रवाई कर रहे हैं, इससे पूरे मामले की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि उच्च पुलिस अधिकारी इस पूरे मामले को किस तरह लेते हैं और क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी या मामला केवल नोटिस तक ही सीमित रहेगा।








