
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/मरणोपरांत दो लोगों को नेत्रज्योति दे गए लक्ष्मण दास कारड़ा
बिलासपुर। सरकंडा निवासी लक्ष्मण दास कारड़ा का बुधवार को निधन हो गया। उनके निधन के बाद परिजनों ने मानवता का परिचय देते हुए नेत्रदान कराने का निर्णय लिया।
मृतक के भाई हरगुन, संतोष, सुनील तथा पुत्र अशोक, चेतन और राहुल ने नेत्रदान के लिए हैंड्स ग्रुप से संपर्क किया। सूचना मिलते ही हैंड्स ग्रुप के अध्यक्ष अविनाश आहूजा अपने सदस्यों के साथ सिम्स के नेत्रदान सलाहकार धर्मेंद्र देवांगन, डॉ. अनिकेत कांबले और डॉ. राकेश मसीह की टीम के साथ उनके निवास स्थान पहुंचे और विधिवत नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।
लक्ष्मण दास कारड़ा के नेत्रदान से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को नई रोशनी मिलेगी। इस मानवीय पहल की क्षेत्र में सराहना की जा रही है।
हैंड्स ग्रुप के सदस्यों ने कहा कि आज भी कई नेत्रहीन लोग रोशनी का इंतजार कर रहे हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। यदि लोग आगे आकर नेत्रदान करें तो कई लोगों के जीवन में उजाला आ सकता है।
नेत्रदान से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें:
विशेषज्ञों के अनुसार मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर नेत्रदान किया जा सकता है। पूरी प्रक्रिया में केवल 10 से 15 मिनट का समय लगता है और इससे दिवंगत व्यक्ति के चेहरे पर कोई विकृति नहीं आती। किसी भी उम्र का व्यक्ति, चाहे वह चश्मा पहनता हो या उसे मधुमेह अथवा उच्च रक्तचाप की समस्या हो, नेत्रदान कर सकता है।
नेत्रदान करने वाले और नेत्र प्राप्त करने वाले दोनों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
मृत्यु के बाद नेत्रदान के लिए जरूरी कदम,
निकटतम आई बैंक से तुरंत संपर्क करें।
दिवंगत व्यक्ति की पलकें बंद कर दें और उन पर हल्की गीली रुई रख दें।
कमरे का पंखा बंद कर दें और संभव हो तो ए.सी. चला दें।
सिर के नीचे तकिया रखकर सिर थोड़ा ऊंचा रखें।
नेत्रदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक माना जाता है, क्योंकि एक व्यक्ति का नेत्रदान दो लोगों के जीवन में रोशनी ला सकता है।








