
संपादक धीरेंद्र कुमार जायसवाल/ धान संग्रहण केंद्र तिल्दा में मजदूरों का धरना जारी
मजदूरों में भेदभाव क्यों?—उठे गंभीर सवाल
तिल्दा (जिला रायपुर)।अपेक्स छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ के अधीन संचालित धान संग्रहण केंद्र तिल्दा, जिला रायपुर में महिला एवं पुरुष मजदूरों द्वारा पिछले पांच–छह दिनों से शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें अनुसूची ‘ख’ (अनुसूचित नियोजन) के तहत निर्धारित मजदूरी और सुविधाएं नहीं दी जा रहीं।
श्रमिकों के अनुसार नियमानुसार 26 कार्यदिवस के आधार पर ₹410 प्रतिदिन एवं ₹10,656 मासिक मजदूरी देय है, लेकिन वास्तविक भुगतान ₹300 से ₹400 के बीच किया जा रहा है। मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि एक ही काम के लिए अलग-अलग मजदूरी दी जा रही है, जिससे मजदूरों के बीच भेदभाव हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कार्य समान है, तो मजदूरी में अंतर क्यों?

धरनारत मजदूरों ने यह भी बताया कि पिछले एक वर्ष से पीएफ (भविष्य निधि) की राशि उनके खातों में जमा नहीं की गई है। इसके साथ ही कार्यस्थल पर सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी है। मजदूरों को दस्ताने तक उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे धान की बोरियों के काम के दौरान हाथों में कटने, जलन और चोट की स्थिति बन रही है।
मजदूरों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
कलेक्टर दर के अनुसार समान वेतन दिया जाए!
मजदूरों के बीच हो रहे भेदभाव को तत्काल समाप्त किया जाए!
पीएफ की बकाया राशि शीघ्र जमा की जाए!
कार्यस्थल पर सुरक्षा साधन अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएं।

मजदूरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे काम बंद कर धरना एवं हड़ताल शांतिपूर्वक जारी रखेंगे। ठेकेदार द्वारा काम बंद होने की चेतावनी पर मजदूरों ने एक स्वर में कहा कि यदि काम बंद होगा, तो सभी का बंद होगा, इसके लिए वे पूरी तरह तैयार हैं।
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज है और अब प्रशासनिक व श्रम विभागीय जांच की मांग उठने लगी है। मजदूरों को उम्मीद है कि कलेक्टर एवं संबंधित विभाग शीघ्र हस्तक्षेप कर उन्हें उनका वैधानिक अधिकार दिलाएंगे।









