
बिलाड़ी के बाद अब ताराशिव की सरकारी जमीन पर उद्योग का प्रस्ताव, ग्रामीणों में आक्रोश
तिल्दा-नेवरा। बिलाड़ी के बाद अब ताराशिव की लगभग 7 एकड़ (2.833 हेक्टेयर) सरकारी जमीन को औद्योगिक उपयोग के लिए प्रस्तावित किए जाने का मामला सामने आया है। लगातार सरकारी जमीनों को उद्योगों के लिए आवंटित किए जाने की प्रक्रिया से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी एवं छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने गांव के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ मिलकर प्रस्तावित औद्योगिक आवंटन का विरोध किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन का उपयोग उद्योगों के बजाय कॉलेज, अस्पताल, स्कूल और अन्य जनहित के कार्यों के लिए किया जाना चाहिए।

संगठनों और ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से सवाल किया है कि बिलाड़ी के बाद अब ताराशिव की सरकारी जमीन को उद्योग के लिए क्यों प्रस्तावित किया जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों की सरकारी जमीनों के औद्योगिकीकरण का सिलसिला आखिर कब तक जारी रहेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन जनता की संपत्ति है, किसी उद्योग की जागीर नहीं। यदि जनभावनाओं को दरकिनार कर औद्योगिक आवंटन किया गया, तो ग्रामीणों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से सड़क से लेकर शासन-प्रशासन के उच्च स्तर तक आंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीणों और संगठनों की प्रमुख मांग है कि ताराशिव की सरकारी जमीन का औद्योगिक आवंटन तत्काल रोका जाए और इसे जनहित के कार्यों के लिए सुरक्षित रखा जाए।
















