
गुढ़ियारी शहरी स्वास्थ्य केंद्र पर लगे आरोप बेबुनियाद -नियमों के तहत हो रहा दवाओं का रखरखाव,फिर भी जाँच, टीम गठित
जबकि असली जाँच CMHO और CGMSC की कार्यप्रणाली पर किया जाना चाहिए
मांग डेढ़ लाख की… भेज दी 3 लाख 30 हजार दवाइयां!आखिर किसका खेल?
रायपुर।
राजधानी स्थित शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुढ़ियारी में करोड़ों रुपये की दवाओं के डंप और एक्सपायरी दवाओं के भंडारण को लेकर हाल ही में जिस प्रकार सनसनीखेज खबरें प्रकाशित हुई थीं, अब उनकी सच्चाई कुछ और ही सामने आती दिख रही है। अस्पताल की वस्तुस्थिति और नियमों की पड़ताल करने पर स्पष्ट हुआ है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा दवाओं का रखरखाव निर्धारित फार्मेसी नियमों एवं FEFO सिस्टम के तहत किया जा रहा था और मरीजों को एक्सपायरी दवाई दिए जाने जैसी बातों का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
हमारे संवाददाता द्वारा अस्पताल का निरीक्षण करने पर पाया गया कि एक्सपायरी दवाइयों को अलग से लॉक-एंड-की व्यवस्था के तहत एक्सपायरी कार्नर में सुरक्षित रखा गया था। स्टोर में किसी भी प्रकार की एक्सपायरी दवाई उपयोग हेतु उपलब्ध नहीं थी। वहीं मेडिसिन वितरण काउंटर पर भी कोई कालातीत दवा नहीं मिली और न ही किसी मरीज को एक्सपायरी दवा दिए जाने की पुष्टि हुई।
अस्पताल प्रबंधन द्वारा FEFO (फर्स्ट एक्सपायर्ड फर्स्ट आउट) सिस्टम के अनुसार नियर एक्सपायरी दवाओं को अलग व्यवस्थित किया गया था, जो कि फार्मेसी प्रबंधन की मानक प्रक्रिया मानी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था दवाओं की बर्बादी रोकने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाती है।
एक्सपायरी दवाओं के निपटान की प्रक्रिया भी नियमों के अनुरूप सामने आया कि एक्सपायरी दवाओं के अंतिम निपटान हेतु आवश्यक प्रक्रिया चल रही थी। नियमानुसार ऐसी दवाओं को पीले रंग के बायो-मेडिकल वेस्ट बैग में सुरक्षित रखा जाता है तथा पर्याप्त मात्रा होने एवं समिति की स्वीकृति के बाद कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (सीबीडब्लूटीएफ) को भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में सामान्यतः 3 से 6 माह का समय लगना स्वाभाविक माना जाता है।
स्पष्ट है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता किए जाने के प्रमाण अब तक सामने नहीं आए हैं। इसके बावजूद केवल गुढ़ियारी अस्पताल को कठघरे में खड़ा करना कई सवाल खड़े कर रहा है।
जबकि असली सवाल-आखिर मांग से दोगुनी दवाइयां किसके इशारे पर भेजी गयी,कहाँ कहाँ भेजी गयी
पूरा मामला अब एक बड़े प्रशासनिक और संभावित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता दिखाई दे रहा है। सूत्रों के अनुसार सीजीएमएससी द्वारा गुढ़ियारी स्वास्थ्य केंद्र को उसकी वास्तविक मांग से लगभग दोगुनी मात्रा में दवाइयां भेजी गईं।
जानकारी के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन ने करीब डेढ़ लाख दवाइयों की मांग भेजी थी, लेकिन लगभग 3 लाख 30 हजार की मात्रा में दवाइयां भेज दी गईं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी दवाओं की बताई जा रही है जिनकी एक्सपायरी अवधि बेहद कम बची हुई थी। सबसे गंभीर बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा कई बार पत्र लिखकर अतिरिक्त दवाइयां वापस लेने अथवा अन्य जरूरतमंद अस्पतालों में स्थानांतरित करने की मांग की गई, लेकिन उच्च अधिकारियों ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इससे यह संदेह और गहरा हो रहा है कि कहीं जल्द एक्सपायर होने वाली दवाओं को जबरन खपाने का खेल तो नहीं चल रहा।
CMHO और CGMSC की भूमिका संदेह के घेरे में
अब बड़ा प्रश्न यह उठता है कि जब अस्पताल प्रबंधन लगातार अतिरिक्त और जल्द एक्सपायर होने वाली दवाओं की जानकारी 3 बार पत्र लिखकर दे दिया है तब आखिर जिम्मेदार उच्च अधिकारी समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?
क्या यह पूरा मामला सरकारी दवाओं की खरीद और खपत में बड़े स्तर की अनियमितता छिपाने का प्रयास है?
क्या एक्सपायरी के करीब पहुंच चुकी दवाओं को विभिन्न अस्पतालों में जबरन भेजकर स्टॉक क्लियर करने की कोशिश की जा रही है ? और सबसे अहम सवाल जब प्राथमिक रूप से अस्पताल प्रबंधन की गलती सामने नहीं आ रही, तब केवल गुढ़ियारी अस्पताल की जांच टीम गठित करना स्पष्ट रूप से वास्तविक दोषियों से ध्यान भटकाने की कोशिश है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा गठित जांच टीम अब खुद सवालों के घेरे में आ रही है। स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का मानना है कि यदि निष्पक्ष जांच करनी है तो गुढ़ियारी अस्पताल मे अनियमितता जैसे भ्रामक बातों पर जाँच न करके जिलेभर के शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में दवा सप्लाई, स्टॉक और एक्सपायरी प्रबंधन की व्यापक जांच होनी चाहिए।
फिलहाल यह स्पष्ट होता दिख रहा है कि गुढ़ियारी अस्पताल प्रबंधन को बिना तथ्यों के कठघरे में खड़ा किया गया, जबकि असली जांच का दायरा जिला स्वास्थ्य प्रशासन और सीजीएमएससी की कार्यप्रणाली तक पहुंचना चाहिए। अब सभी की निगाहें जाँच टीम पर टिकी है की आखिर टीम कब जाँच पर जाएगी और क्या जांच प्रतिवेदन बनेगा। आगे आने वाले खुलासों पर हम नजर बनाये रखे है।














