
आजादी के 7 दशक बाद भी सड़क से वंचित भालूपानी गांव
✍️ संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/ सारंगढ़-बिलाईगढ़ | जय जोहार सीजी न्यूज़
बरमकेला। एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाओं से प्रभावित होकर ओडिशा के ग्रामीण छत्तीसगढ़ में शामिल होने की इच्छा जता रहे हैं, वहीं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का एक गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ओडिशा में शामिल होने की बात कर रहा है।
हम बात कर रहे हैं ग्राम पंचायत परधियापाली के आश्रित ग्राम भालूपानी की, जहाँ सैकड़ों लोग अब भी वाहन योग्य सड़क सुविधा से वंचित हैं।
🚑 कंधे पर उठाकर अस्पताल ले जाते हैं मरीज:
भालूपानी गांव के लोग सड़क के अभाव में मरीजों को आज भी खाट या डंडों के सहारे उठाकर अस्पताल ले जाने को मजबूर हैं। मेढ़नुमा ऊबड़-खाबड़ रास्तों के कारण आए दिन हादसे होते हैं। यह कोई कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीणों की रोज़मर्रा की त्रासदी है।
🏞️ बोझा ढोने को मजबूर ग्रामीण:
सड़क न होने के कारण यहाँ के लोगों को सामान पीठ पर उठाकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। बीमार होने की स्थिति में तो हालात और भी भयावह हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 75 साल बाद भी वे विकास से कोसों दूर हैं।
❓ नेताओं से टूटा भरोसा:
ग्रामीणों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हर चुनाव में सड़क निर्माण का वादा किया जाता है। नेता जीतने के बाद कभी वापस नहीं आते। स्थानीय प्रतिनिधियों की नीयत और कार्यशैली पर भी अब सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि उनका प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मोहभंग हो चुका है।
📞 क्या बोले जनपद सीईओ?
जब इस समस्या पर जनपद सीईओ श्री पटेल से दूरभाष पर बातचीत की गई तो उन्होंने कहा—
“मुझे अभी जानकारी प्राप्त हुई है। मैं स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं पंचायत कर्मियों से मामले का संज्ञान लेकर इसे प्राथमिकता क्रम में रखवाऊँगा।”
⚡ ग्रामीणों की मांग:
ग्रामीण अब साफ कह रहे हैं कि—हमें भी सड़क, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएँ चाहिए।
प्रशासन अब सिर्फ आश्वासन नहीं, जमीनी कार्रवाई करे।














